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वैश्विक स्तर पर बुलडोजर अभियान की उड़ी धज्जियां।
मुसलमान समुदायो पर हमला क्यों ?
हिन्दू राष्ट्रीय की कल्पना, राष्ट्रहित के लिए खतरा ?
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हाल ही में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की सरकार ने बुल्डोजर अभियान के तहत कई लोगो के घर ध्वस्त किये हैं। उनमे से अधिकतर मुस्लिम समुदाय और कम आय वर्ग वाले लोगो के घर शामिल हैं। अब इस अभियान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम कर निंदा हो रही हैं।
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अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ की वार्षिक रिपोर्ट दो हजार बाईस के मुताबिक भारत के विभिन्न राज्यों की सरकारों ने कम आय वाले समूहों, विशेष तौर पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ ग़ैर-न्यायिक सज़ा के तौर पर उनके घर गिराने की कार्रवाई की है।
बताते चले कि ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ अमेरिका की सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन है। यह स्वंसेवी संगठन मानवाधिकारों की वकालत और उनसे संबंधित अनुसंधान करती है। साथ ही यह संगठन मीडिया का ध्यान मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर खींचता है।
इस संगठन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत सरकार और इसके हिन्दू राष्ट्र एजेंडे की जमकर आलोचना की हैं। रिपोर्ट में ऐसी कई घटनाओं का उल्लेख किया गया है जिसमे मुस्लिम समुदाय को राज्य सरकार द्वारा निशाना बनाया गया हो।
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में अधिकारियों ने मध्य प्रदेश, गुजरात और दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पों के जवाब में मुस्लिमों के स्वामित्व वाली संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया। हालांकि, उन्होंने संपत्तियों के अवैध होने का दावा करके विध्वंस को सही ठहराने की कोशिश की, लेकिन यह कार्रवाई मुसलमानों के लिए सामूहिक सजा प्रतीत होती है।’
आपको बताते चलें कि इस रिपोर्ट में बिलकिस बानो के ग्यारह आरोपियों की रिहाई का भी जिक्र किया गया हैं। साथ ही मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के गृह मंत्री द्विज नरोत्तम मिश्रा के उस बयान का हवाला भी दिया गया, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक तौर पर धमकी दी थी कि ‘पत्थरबाजी’ में शामिल लोगों के घरों को ‘मलबे में बदल’ दिया जाएगा।
बताते चले कि रिपोर्ट में मोदी सरकार की तुलना चीन की उस क्रूर और तानाशाह सरकार से की हैं जिसने सत्ता पाने के लिए अल्पसंख्यकों का दमन किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू-राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी ने उन्हीं उल्लंघनों में से कई की नकल की है, जिनसे चीनी सरकार ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए दमन किया। जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित भेदभाव, शांतिपूर्ण असंतोष का दमन, और स्वतंत्र अभिव्यक्ति को दबाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल।’
संगठन ने अपने वार्षिक रिपोर्ट में यह आरोप लगाया है कि, भारत में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए मुख्य रूप से सरकारी संस्थानो की सक्रिय मिलीभगत जिम्मेदार थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईसाइयों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों से आने वालों को निशाना बनाने के लिए’ उनके खिलाफ जबरन धर्मांतरण रोकने संबंधी कानूनों का दुरुपयोग किया।







