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बीते दिनों महाविद्यालय गोपेश्वर में बालिकाओं के लिए खोले गए नए छात्रावास के नामकरण को लेकर मूलनिवासी विद्यार्थी संघ जिला इकाई चमोली ने मूलनिवासी महापुरुषों के नाम का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा की राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले और राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले ने सर्वप्रथम समाज में महिला शिक्षा पर जोर दिया था।
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बताते चले की उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित महाविद्यालय गोपेश्वर में बालिकाओं के लिए नए छात्रावास का निर्माण कराया गया। जिसका संचालन भी शुरू हो गया हैं। लेकिन अभी तक इसका नामकरण नही किया गया हैं।
यह छात्रावास बीते कई दिनों से बिना नामकरण के संचालित हो रहा हैं। जिसके नामकरण को लेकर मूलनिवासी विद्यार्थी संघ, चमोली की टीम ने भारत की प्रथम अध्यापिका राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले और राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले के नाम का सुझाव दिया हैं।
इसपर मूलनिवासी विद्यार्थी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मूलनिवासी ममता मैडम और जिला प्रभारी मूलनिवासी धीरज कुमार ने कहा की, महाविद्यालय गोपेश्वर में बालिकाओं के लिए नया छात्रावास बनाया गया हैं। जिसका संचालन शुरू हो गया है। लेकिन अभी तक इस छात्रावास का नामकरण नहीं किया गया हैं।
उन्होंने कहा की, उनका संगठन चाहता है की इस छात्रावास का नाम शिक्षा के क्षेत्र में वास्तविक रूप से कार्य करने वाले महापुरुषों के नाम से रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा की, राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले का महिला शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान हैं और आज उसी का नतीजा है की महिलाओं को शिक्षा का अधिकार मिला हैं।
मूलनिवासी विद्यार्थी संघ, चमोली ने कहा की, सभी जातियों के लिए माता सावित्री बाई फुले की ओर से ही सबसे पहले उन्नीस सौ अड़तालिस में पुणे के भिड़ेवाड़ी इलाके में अपने पति राष्ट्रपिता ज्योतिबा फूले के साथ मिलकर पहला स्कूल खोला गया था।
जिसके बाद लगातार इन दोनो ने मिलकर महिला शिक्षा के क्षेत्र में अनेकों कार्य किए। उन्होंने कहा की, पहला स्कूल खोलने के सिर्फ एक वर्ष में सावित्रीबाई फुले और महात्मा फुले ने पांच नए विद्यालय खोले थे।






