मणिपुर की स्थिति को लेकर पीपीआई (डी) ने राष्ट्रपति महोदया के नाम सौंपा ज्ञापन।

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पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) ने मणिपुर की हिंसा और प्रदेश से आ रही अमानवीय दृश्यों को लेकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा हैं। जिसमे पार्टी ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जो दिया है। पार्टी ने दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने के साथ साथ पीड़ित महिलाओं को पचास पचास करोड़ रुपए का मुआवजा और हत्या के शिकार हुए पुरुषो के परिवारों को पांच से दस करोड़ रुपए मुआवजा तत्काल जारी करने की मांग की हैं।

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मणिपुर की घटना ने भारत की समस्त जनता चिंतित है। अब भारत की राजनीति में तेजी से अपना नाम बनाने वाली राजनीतिक पार्टी पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) भी मणिपुर की स्थिति को लेकर महामहिम के नाम ज्ञापन सौंपा है।

पीपल्स पार्टी आफ इंडिया ( डेमोक्रेटिक) ने कहा की, पार्टी मणिपुर की घटनाओं से सदमे में हैं। यदि चार मई की घटनाओं का वीडियो वायरल न होता तो मणिपुर सरकार की असफलता की असलियत भी सामने नहीं आती। मीडिया में आई खबरों के अनुसार इसमें पुलिस की संलिप्तता या मूकसमर्थन भी प्रमाणित होता है।

पार्टी ने कहा की, पांच मई को भी कांगपोकली की रहने वाली दो महिलाओं को भीड़ ने इंफाल से अपहरण किया। उनका सामूहिक दुष्कर्म किया और उनकी हत्या कर दि गई ।

पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) ने कहा की, पार्टी मणिपुर में महिलाओं के साथ हुए और हो रहे अमानवीय तथा असंवैधानिक आपराधिक कुकर्मों की पुरज़ोर भर्त्सना करती है। निश्चित ही हत्यारों को फांसी की सजा होनी चाहिए।

पार्टी ने पत्र में कहा की, यह कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है। चार मई को करीब आठ सौ से एक हजार लोगों द्वारा हमला करके पुरूषों की हत्या कर देना एवम् महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म करना और राज्य पुलिस की मौज़ूदगी में ये सब होना। यह स्पष्ट करता है कि मणिपुर में संवैधानिक शासन-प्रशासन पूर्णतः ध्वस्त हो चुका है।

पार्टी ने कहा की, देश की खुफिया एजेंसी, राज्य की खुफिया एजेंसी, सत्ताधारी दल का संगठन तंत्र, विधायक, सांसद, और पुलिस का अपना खबरी तंत्र रहते हुए, ऐसा नहीं माना जा सकता कि इतनी बड़ी दुर्घटनायें सरकार की जानकारी के बग़ैर हो रही हैं। इसलिए जो इन घटनाओं में षणयंत्रकारी जैसी भूमिका में नज़र आ रहे हैं उनसे न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती।

पार्टी अपने पत्र में राष्ट्रपति महोदया से कहती है की, संविधान की उद्दशिका के अनुसार व्यक्ति की गरिमा को सुनिश्चित करना ये संविधान का उद्देश्य है। मणिपुर में इस उद्देश्य प्राप्ति में राज्य और केंद्र सरकार असफल हुई हैं। उपरोक्त कारणों को ध्यान में रखते हुए पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) इस संवैधानिक असफलता पर विचार किया है और आपसे यह निवेदन करने का निर्णय लिया है कि, (क) मणिपुर की सरकार को संवैधानिक रूप से असफल और आपराधिक षड्यंत्रणुमा व्यवहार के कारण तत्काल भंग किया जाय।

(ख) केंद्र सरकार को भी पक्ष मानते हुए, मणिपुर शासन-प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के नियंत्रण में दिया जाय। (ग) मणिपुर के संबंध में मई से अबतक की सभी खुफिया एजेंसियों की दैनिक रिपोर्टिंग को सार्वजनिक किया जाय। उनपर सरकारी कार्यवाही को भी सार्वजनिक किया जाय।

पार्टी ने कहा की, (घ) क्योंकि सम्मान और गरिमा अमूल्य धरोहर हैं अतः पीड़ित महिलाओं को तत्काल पचास-पचास करोड़ मुआवजा जारी किया जाय। (ड़) सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में किसी निषपक्ष जांच ऐजेंसी को सभी केस दिये जायं। (च) हत्या, बलत्कार, आगजनी के सभी मामलों में अपराधियों के लिए विशेष अदालत गठित कर त्वरित अदालती प्रक्रिया पूर्ण कर मृत्यु दंड दिया जाय।

साथ ही, (छ)हत्या के शिकार पुरूषों के परिवारों को पांच से दस करोड़ मुआवजा तत्काल जारी किया जाय। और (ज़) भीड़ के सभी आठ सौ से एक हजार लोगों और पुलिस वालों को तथा सभी साजिश रचने वालों को बराबर का अपराधी मानते हुए केस चलाने के लिए गिरफ्तार किया जाये और उनकी समस्त संपत्तियों को जब्त किया जाय।

ये कुछ मांगे थी, देश की राजनीति में सबसे तेजी से उभरने वाली पार्टी पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया की। जिसने इन मांगों को लेकर महामहिम के नाम ज्ञापन सौंपा हैं।

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