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बीते सौलह जुलाई, दो हजार तेईस को उत्तराखंड के देहरादून में मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ द्वारा प्रथम राज्य स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसका विषय था, “संविधान में प्रदत्त अधिकारों की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य- एक परिचर्चा” । कार्यक्रम की शुरुआत संविधान की प्रस्तावना से की गई। जिसमे प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए मूलनिवासियों ने हिस्सा लिया।
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उत्तराखंड के देहरादून में मक्क्म यानी मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ का प्रथम राज्यस्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत आईएएस मू.सुवर्धन शाह एवम् विशिष्ठ अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता मूलनिवासी रुही अंजुम उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन मक्कम के राज्य अध्यक्ष मू० सुदेश गौतम ने, प्रस्तावना मू० परम कीर्ति राव गौतम ने जबकि अध्यक्षता मक्क़म के राज्य संगठन सचिव मू० बी. पी. सिंह ने किया।
वही कार्यक्रम में मार्गदर्शक के रूप में बामसेफ के राज्य अध्यक्ष मू० परमानंद बेनीवाल उपस्थित रहे। जबकि वक्तागण के रूप में मू० आर एल आर्या, मू० डॉ० आदेश कुमार, मू० धर्म कीर्ति फूलजले, मूलनिवासी सभ्यता संघ के राज्य अध्यक्ष मू० मानवेंद्र कुमार, मू० उमेश कुमार एवं मू. भूपेंद्र सिंह उपस्थित रहे।
राज्यभर से करीब सौ से अधिक लोग इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम का आरंभ भारत के संविधान की उद्देशिका से किया गया। कार्यक्रम और विषय की प्रस्तावना में अपने विचार रखते हुए डॉ० परम कीर्ति राव गौतम ने कहा कि, संविधान बनाते समय जो अधिकार भारत के नागरिकों को दिए गए थे, वर्तमान में यह अधिकार हमें खत्म होते हुए दिख रहे हैं।
डॉ० परम कीर्ति राव गौतम ने संविधान की उद्देशिका के भावार्थ को समझाते हुए बताया कि, भारत के नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा की गारंटी भारत का संविधान देता है, किंतु देश में गैर बराबरी को कायम रखने वाले लोग संवैधानिक व्यवस्था का अनुपालन उसकी निर्देशों के अनुसार नहीं करते हैं।
कार्यक्रम में मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित बामसेफ के प्रदेश अध्यक्ष मू० परमानंद बेनीवाल ने बामसेफ और उसकी सभी ऑफशूट विंग्स के बारे में विस्तार से जानकारी देने के साथ साथ बीएस फोर राष्ट्रव्यापी महा जनजागरण अभियान को विस्तार से बताया और राज्य भर में होने वाले पांच कलस्टर अधिवेशनो को सफल बनाने की अपील की।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मू ० सुवर्धन शाह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि, हमें सबसे पहले अपने देश और संविधान को सर्वोपरि रखना होगा। अपने देश और संविधान की रक्षा हर हाल में करनी चाहिए। चाहे इसके लिए हमें बलिदान ही क्यों ना देना पड़े। हमे देसी समाहित और अपने महापुरुषों को याद रखना चाहिए।
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि, आखिर किस प्रकार डॉक्टर अंबेडकर अकेले ही पूरे जीवन लड़ते रहे। उन्होंने समाज के लिए एक बेहतर संवैधानिक व्यवस्था को बनाने में अपनी प्रमुख भूमिका निभाई। आज हमें उनके द्वारा दिए गए अधिकारों को बचाकर रखने में समस्या आ रही है, जबकि उस वक्त से ज्यादा पढ़ा लिखा समाज आज यहां है। उन्होंने लोगो से कहा, हम पढ़े-लिखे वर्ग को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी को निभाना होगा।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित मूलनिवासी रुही अंजुम ने कहा कि, भारत का संविधान प्रत्येक भारतीय के लिए बहुत ही आवश्यक है। इसके अमल से ही हम एक खूबसूरत भारत का निर्माण कर सकेंगे। हम सभी कोरोना के दौर से बाहर निकलकर आए हैं इसलिए हमें इंसानियत को कायम करना होगा। उन्होंने अपने भाषण के दौरान कार्यक्रम की तारीफ की।
मूलनिवासी सभ्यता संघ के प्रदेश अध्यक्ष मू० मानवेंद्र कुमार ने आंदोलन में मूलनिवासी सभ्यता संघ की भूमिका और जिम्मेदारी को विस्तार से बताया। मूलनिवासी संकल्पना क्या है? इसपर अपने विचार रखे एवं सहयोग की अपील की।
मक्कम, जिला इकाई हरिद्वार के जिलाध्यक्ष डॉ० आदेश कुमार ने बताया की कैसे आज भेदभाव का तरीका बदल गया है। उन्होंने वर्तमान के स्थिति पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि, अब भेदभाव का तरीका बदल गया है। अब संविधान के कारण प्रत्यक्ष रूप में नहीं अप्रत्यक्ष रूप से भेदभाव किया जा रहा हैं।
मू० धर्मकीर्ति फुलजले ने संविधान से मिले मूलनिवासियों को उनके अधिकार व सेफगार्ड के बारे में बताया। उन्होंने कहा की, अभिव्यक्ति की आजादी की वजह से हम सब इस हॉल में बैठकर इस कार्यक्रम में संविधान एवं राष्ट्र के प्रति अपनी विचारों को व्यक्त कर रहे हैं ।
उन्होंने आगे कहा, संविधान सुरक्षित रहेगा तो हम सब सुरक्षित रहेंगे। इसलिए हमें संविधान के सम्मान सुरक्षा एवं संवर्धन के कार्यक्रम में तन मन और धन से लग जाना चाहिए।
मू० भूपेंद्र सिंह ने संविधान बनने के पूरे ऐतिहासिक पहलू पर विचार रखा। साथ ही उन्होंने बामसेफ के बनने से लेकर आज उसकी तीसरी पीढ़ी में सफलतापूर्वक स्थांतरित होने के इतिहास पर अपने विचार रखे तथा मक्कम क्यों बनाया गया और इसका विस्तार कैसे होगा? इस विषय पर उपस्थित साथियों से चर्चा किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मू ० बी० पी० सिंह ने विषय की गंभीरता को बताते हुए कहा कि, संविधान निर्माताओं ने भारत कैसा होना चाहिए यह हमें संविधान की उद्देशिका को पढ़कर और समझकर जानकारी प्राप्त होती है।
वैसा भारत बनाने के लिए संविधान में बाइस भाग लिखे गए। उनमें से भाग तीन में मूल अधिकार दिए गए हैं। जिसमें सात अधिकारों को रखा गया है । यह अनुच्छेद बारह से लेकर अनुच्छेद पैंतीस तक है। जिसमें समता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार, कुछ विधियों की व्यावृति एवं सांविधानिक उपचारों का अधिकार हैं।
उन्होंने कहा की, इसके अतिरिक्त भाग चार में राज्य के नीति निर्देशक तत्व है जो अनुच्छेद छत्तीस से लेकर अनुच्छेद इक्यावन तक है। यह भी भारत के नागरिकों के अधिकार ही है और राज्य की संवैधानिक संथाओं की जिम्मेदारी इसके लिए तय की गई है कि वे योजनाएं एवं नीतियां बनाकर नागरिकों को प्रदान करें।
वे आगे कहते है, संविधान में संशोधन की व्यवस्था रखी गई है और यह इस लिए की जब हम यह उद्देश्य प्राप्त कर लें तो उससे अधिक लाभ नागरिकों को देने के लिए संशोधन की व्यवस्था बनाई गई थी । किंतु संशोधन को आधार बनाकर नागरिकों के अधिकारों पर कुठाराघात किया जा रहा है। इसलिए आज हमें इस विषय पर चर्चा करनी पड़ रही है।
उन्होंने कहा की, सविधान निर्माताओं ने विशेष कर बाबासाहेब डॉ आंबेडकर ने भारत में समता मूलक समाज का सपना देखा था। भारत में विभिन्न जातियां, धर्म, समुदाय, क्षेत्र, भाषा एवं संस्कृति के लोग रहते हैं जो मिलकर इस देश को एक महान राष्ट्र बनाएंगे और यह जिम्मेदारी संविधान निर्माताओं ने संवैधानिक संस्थाओं की लगाई थी ।
लेकिन उसमें बैठे लोगों ने क्या किया? और क्या कर रहे हैं? यह किसी से छुपा नहीं है। यह तब तक संभव नहीं है जब तक भारत में एक जाति विहीन समाज नहीं बनेगा और समाज संविधान को व्यवहार में नहीं लाएगा। इसलिए हम सबको मिलकर इसके लिए प्रयास करना होगा।
उन्होंने कहा की, बामसेफ संगठन सन् उन्नीस सौ अठहत्तर से लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए वह कभी बहुजन संकल्पना तो कभी मूलनिवासी संकल्पना के आधार पर और अब बीएस फोर (भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन ) राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान को आधार बनाकर यह कार्य कर रहा है।
इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए बामसेफ ने पांच ऑफशूट विंग्स बनाए हैं। जिनमे से एक कर्मचारी वर्ग की समस्याओं के लिए मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ है। शोषितों, पीड़ितों, वंचितों, पिछड़ो तथा अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों का कोई भी राष्ट्रीय संगठन नहीं है। जो संविधान के दायरे में काम करें और समस्याओं का निदान डिपार्टमेंट स्तर से लेकर केंद्रीय स्तर तक कर सके।
मू० बी ० पी ० सिंह ने बताया की, मक्कम ने राष्ट्रस्तर पर अपने दस बिंदु तैयार किए है जो कर्मचारियों की समस्याओं से संबंधित है। मक्कम निजीकरण के खिलाफ जनजागरण अभियान भी चला रहा है। निजीकरण एवं अन्य कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर मुलनिवासी जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी दे रहा हैं और साथ ही साथ यह अपील ही भी कर किया जा रहा हैं कि वह इसे विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा के सत्रों में या अन्य उचित स्थान पर प्रस्तुत करें।
उन्होंने बताया की, न्यायालय में भी मक्कम कर्मचारियो के मुद्दों पर लड़ाई लड़ रहा हैं साथ ही साथ अन्य संगठनों के साथ सहयोग एवं समन्वय भी स्थापित किया जा रहा हैं। बीएस फोर अभियान के अंतर्गत मक्कम अपने सभी कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
उन्होंने कहा की, मूलनिवासियों के साथ-साथ समस्त भारत के नागरिकों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए आप सभी पढ़े लिखे बुद्धिजीवी वर्ग से अपील है कि समता मूलक समाज का भारत बनाने के लिए आप हमारा साथ दीजिए ।







