क्या भारत में ईवीएम मशीनों को हैक करना संभव हैं?

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ईवीएम मशीनों का विरोध भारत में कई सालो से चलता आ रहा हैं और ये विरोध आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कई अधिक बढ़ चुका हैं। लेकिन क्या सच में ईवीएम मशीनों को हैक किया जा सकता हैं? और भारत में साइबर सुरक्षा की स्थिति क्या हैं? आज हम इस विषय पर चर्चा करेंगे।

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ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन इलेक्ट्रॉनिक साधनों का प्रयोग करते हुए वोट डालने और वोटों की गिनती करने वाला एक मशीन हैं।

ईवीएम का इस्तेमाल भारत में पहली बार उन्नीस सौ बिरासी में केरल के उत्तर परवूर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में किया गया था।

सन् उन्नीस सौ निन्यानवें में गोवा विधानसभा के आम चुनाव में पहली बार ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ) का इस्तेमाल किया गया।

वही दो हजार चौदह से भारत के सभी आम चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का उपयोग किया गया । जिसमे भाजपा बहुमत के साथ सत्ता में आई थीं।

हालांकि, समय-समय पर इन मशीनों की प्रामाणिकता पर सवाल उठते रहे हैं। भारत में साल दो हजार चौदह के चुनाव के बाद से ही विपक्ष की राजनीतिक पार्टियों समेत कई सामाजिक संगठनों ने भी ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे।

आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए वर्तमान में ईवीएम का विरोध और भी अधिक बढ़ गया हैं। खास कर राजधानी में ईवीएम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखा जा सकता हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव से पहले अमरीका के एक हैकर ने दावा किया कि साल दो हजार चौदह के चुनाव में मशीनों को हैक किया गया था। जिससे इस चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की थी।

लेकिन भारतीय चुनाव आयोग ने कई बार ईवीएम के खिलाफ उठने वाले इन दावों का खंडन किया है। लेकिन इन मशीनों में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर कई बार आशंकाएं ज़ाहिर की गई हैं।

भारत में ईवीएम को हैक किया जा सकता है या नहीं यह तकनीकी सुरक्षा पर निर्भर करता हैं। भारत में कई बार विभिन्न सरकारी विभागों के वेबसाइट को हैक किया जा चुका हैं।

हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को बताया है कि जनवरी दो हजार अठारह से सितंबर दो हजार तेईस तक केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकार के संगठनों की कुल मिलाकर तीन सौ तिहत्तर वेबसाइट हैक की गईं हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दो हजार अठारह में एक सौ दस, दो हजार उन्नीस में चौवन, दो हजार बीस में उनसठ, दो हजार इक्कीस में बयालीस, दो हजार बाईस में पचास और दो हजार तेईस में अंठावन केंद्रीय और राज्य सरकार के संगठनों की वेबसाइट को हैक किया गया हैं।

चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा करती हैं। लेकिन अमरीका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों ने एक डिवाइस को मशीन से जोड़कर दिखाया था कि कैसे मोबाइल से संदेश भेजकर मशीन के नतीजों को बदला जा सकता है।

वहीं, मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञ धीरज सिन्हा मानते है कि, ईवीएम को हैक किया जा सकता हैं। लेकिन इसके लिए एक बहुत ही छोटे रिसिवर सर्किट और एक एंटीना को मशीन के साथ जोड़ने की ज़रूरत होगी, जो इंसानी आंख से दिखाई नहीं देगा। इसके साथ ही इस काम में मशीन निर्माता और चुनाव कराने वाली संस्था का शामिल होना ज़रूरी है।

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