मनुवादियों ने फिर रोकी मूलनिवासी दूल्हे की बारात।

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खबर गुजरात की हैं। जहा बारात जाते मूलनिवासी दूल्हे को घोड़ी से उतारकर उनपर हमला किया गया। दर्ज शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने दूल्हे को जातिसूचक गालियां देकर उनके साथ मारपीट भी कि।

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जो लोग ये कहकर आरक्षण के विरुद्ध चिल्लाते हैं की अब भारत में जातिवाद से जुड़ी घटनाएं नहीं होती हैं, उनलोगो को हाल ही में गुजरात में हुई जातिगत घटना पर शर्म करना चाहिए।

बीते दिनों गुजरात में कुछ मनुवादियों ने एक मूलनिवासी दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ने नहीं दिया। उनके साथ अपत्तिजनक व्यवहार किया । साथ ही मारपीट भी की गई।

यह घटना गांधीनगर के एक गांव की है। पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक़, हमलावरों ने बारात में दूल्हे को घोड़ी से नीचे खींच लिया, उसके साथ मारपीट की और जातिसूचक गालियां देते हुए कहा कि केवल ऊंची जाति के लोग ही घोड़ी पर चढ़ सकते हैं।

बताइए आज भी भारत में ऐसी घटनाएं घट रही हैं। संविधान लागू होने के सात दशक बाद भी इस देश में जाति आधारित घटनाएं शर्मशार करने वाली हैं। यह घटनाएं भारतीय संविधान के मूल्यों के बिल्कुल विपरीत हैं।

इस मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, दूल्हा करीब सौ लोगों के साथ बारात में घोड़ी पर सवार था और गांव में दुल्हन के घर जा रहा था, तभी मोटरसाइकिल पर सवार एक व्यक्ति ने उसे रोक लिया और घोड़ी से नीचे खींचकर थप्पड़ मारा।

दर्ज एफआईआर के मुताबिक आरोपी ने दूल्हे को जातिसूचक गालियां भी दीं और उसके घोड़ी पर चढ़ने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि केवल ऊंची जाति के लोग ही घोड़ी चढ़ सकते हैं।

शिकायतकर्ता ने एफआईआर में बताया कि आरोपी के साथ तीन और लोग उसका साथ देने आ गए और चारों ने पीड़ित को गाली और धमकी देना शुरू कर दिया।

खबरों की माने तो दूल्हे पर हमला गांधीनगर के कलोल स्थित चदासन गांव के निवासियों ने किया था।

आरोप हैं कि, आरोपियों ने हमले के दौरान कथित तौर पर कहा कि घोड़ी पर बारात निकालने से पहले अनुमति लेनी पड़ेगी। मजबूरन दूल्हे को चार पहिए में बारात जाना पड़ा।

हालांकि पीड़ित के चचेरे भाई की ओर से दर्ज शिकायत पर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया ।

गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की पहचान शैलेश ठाकोर, जयेश ठाकोर, समीर ठाकोर और अश्विन ठाकोर के नाम से की गई हैं।

चारो आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा तीन सौ इकतालीस (गलत तरीके से रोकना), तीन सौ तेईस (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), पांच सौ चार (जानबूझकर अपमान करना), पांच सौ छह (दो) (आपराधिक धमकी) और अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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