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भाजपा और कांग्रेस भले ही लोगो के सामने दो अलग अलग राजनीतिक पार्टियां हैं, लेकिन इन दोनो पार्टियों ने अपने अपने कार्यकाल में देश के पचासी फीसदी मूलनिवासी बहुजन समाज को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया हैं। जबकि आज भी इस समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने अधिकारों से वंचित हैं।
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इस देश में आजादी के बाद से लगभग साठ – सत्तर सालों तक कांग्रेस का शासन रहा। जिसने अपने कार्यकाल में देश के पचासी फीसदी मूलनिवासी बहुजन समाज का खूब शोषण किया।
मनुवादियों को पता था की कांग्रेस के बाद यह समाज एक वैकल्पिक पार्टी ढूंढेगी। जिसके लिए इस व्यवस्था ने भाजपा को तैयार किया।
देश की पचासी फीसदी मूलनिवासी बहुजन समाज ने भाजपा को देश की सत्ता सौंपी । लेकिन अपने पूरे कार्यकाल में भाजपा ने सिर्फ और सिर्फ इस समाज के अधिकारो के साथ खिलवाड़ किया।
भाजपा के नौ साल के कार्यकाल में अब तक लोगो को समझ आ जाना चाहिए की भाजपा और कांग्रेस दो अलग अलग राजनीतिक पार्टियां जरूर है लेकिन इनका विचारधारा अलग नही हैं।
यूं कह ले की भाजपा और कांग्रेस किसी दो मुहें सांप की तरफ है और जिसका पूछ आरएसएस हैं। जो देश के पचासी फीसदी मूलनिवासी बहुजन समाज को गुलाम बनाकर रखने की व्यवस्था पर काम करता हैं।
कांशीराम साहब का एक नारा आज भी प्रचलित हैं। वे कहा करते थे की, जिसकी जितनी संख्या भारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी। लेकिन भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने कभी भी इस समाज को इनकी हिस्सेदारी नहीं दी।
इन दोनो ही पार्टियों ने कभी भी संविधान को पूर्ण रूप से लागू नहीं करवाया। इन दोनो के ही शासन में हमेशा देश के मूलनिवासियों के साथ शोषण होता रहा। आज भी देश के विभिन्न क्षेत्रों में मूलनिवासी बहुजन समाज की हिस्सेदारी उनकी संख्या से बहुत कम हैं।








