क्या जाति देखकर जेलों में दिया जाता हैं काम?

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इस देश का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हैं जो जातिगत भेदभाव से अछूता होगा? हमने स्कूल से लेकर बड़े शैक्षणिक संस्थानों में भी जातिगत भेदभाव की खबरें देखी और सुनी हैं, लेकिन इस बार भारतीय जेलों में हो रही जातिगत भेदभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत ग्यारह राज्यों को नोटिस भेजा हैं।

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हाल ही में जेलों में होने वाली जातिगत भेदभाव की समस्या को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और ग्यारह राज्यों को नोटिस भेजा हैं।

देशभर की जेलों में बंद कैदियों की जाति देखकर उन्हें काम दिए जाने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के साथ ग्यारह राज्यों को नोटिस भेजा हैं।

जेलों में जाति-आधारित भेदभाव को बढ़ावा देने वाले जेल मैनुअल को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बीते तीन जनवरी, दो हजार चौबीस को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित ग्यारह राज्यों से जवाब मांगा है।

कोर्ट ने केंद्र समेत जिन राज्यों से जवाब मांगा है वे राज्य उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, ओडिशा, झारखंड, केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र हैं।

इन सभी राज्यों को नोटिस जारी करने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख चार हफ़्ते बाद की रखी हैं, जिसमे सभी से जवाब मांगा गया हैं।

बताते चले की, महाराष्ट्र के कल्याण की सुकन्या शांता द्वारा दायर इस जनहित याचिका में कहा गया था कि, कई राज्यों के जेल मैनुअल जेलों में जाति-आधारित भेदभाव को बढ़ावा देते हैं।

उनका आरोप है की, जेलों के अंदर काम के आवंटन में भेदभाव किया जाता हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रत्येक आरोपी व्यक्ति, जो जेल में दाखिल होता है, उससे जाति पूछी जाती है। ह्यूमन राइट्स से जुड़ी एक संस्था ने दावा किया था कि निचले तबके के बंदियों को शौचालय व जेलों की सफाई जैसे काम सौंपे जाते हैं।

रिपोर्ट्स का दावा है की, जाति पिरामिड के निचले भाग वाले सफाई का काम करते हैं, उनसे उच्च वर्ग वाले रसोई या लीगल दस्तावेज विभाग को संभालते हैं। जबकि अमीर और प्रभावशाली कोई काम नहीं करते।

याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील मुरलीधर ने कहा कि, जेलों में छोटी जातियों के कैदियों और आदतन अपराधियों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है। छोटी जाति के कैदियों के साथ भेदभाव होता है और उन्हें उनकी जाति के मुताबिक काम दिया जाता है।

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