मणिपुर हिंसा को लेकर पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) जिला इकाई, नागपुर ने महामहिम के नाम सौंपा ज्ञापन।

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बीते अठाईस जुलाई, दो हजार तेईस को महाराष्ट्र के नागपुर जिला इकाई द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से मणिपुर हिंसा को लेकर महामहिम को ज्ञापन सौंपा गया। पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) जिला इकाई, नागपुर ने महामहिम से मणिपुर सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की हैं।

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मणिपुर की स्थिति किसी से छुपी नहीं हैं। बीते कुछ दिनों से मणिपुर हिंसा की जिस तरह से तस्वीरे दुनिया के सामने निकल कर आई हैं, इससे हम अंदाजा लगा सकते हैं की राज्य में जातीय हिंसा की क्या स्थिति हैं?

वीडियो के माध्यम से हमे पता चलता है की कैसे चार मई को एक भीड़ द्वारा दो महिलाओं के परिवारों को मार दिया जाता है और उन्हें निर्वस्त्र करके घुमाया जाता है। और उनके साथ दरिंदगी की सारे हदे पार की जाती हैं और इस घटना का वीडियो हम और आप तक पहुंचने में दो महीने से भी अधिक का समय लग लग जाता हैं।

इस वीडियो को और मणिपुर की हालातो को देखने के बाद लोग मणिपुर और केंद्र की बीजेपी सरकार की नाकामी पर सवाल उठा रहे हैं। लोग प्रदेश की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर रहे हैं।

बीते दिनों अठाईस जुलाई, दो हजार तेईस को पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) जिला इकाई, नागपुर ने इस संबंध में जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपा हैं। जिसमे उन्होंने मणिपुर सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग कर रहे हैं।

साथ ही इस हिंसा से जुड़े सभी आठ सौ से एक हजार लोगो समेत, शासन – प्रशासन से जुड़े सभी लोगो को बराबर का अपराधी मानते हुए फांसी देने का निवेदन किया हैं।

बताते चले की कुकी समाज की जिन दो महिलाओं को निर्वस्त्र करके घुमाया गया था। उन्होंने खुद द वायर को दिए एक इंटरव्यू में कहा था की जब हमें सड़क पर निर्वस्त्र कर घुमाया जा रहा था तब पुलिस कार पर बैठी थी लेकिन हमारी मदद नहीं की।

पार्टी ने कहा की, चार मई को आठ सौ से एक हजार लोगो द्वारा हमला करके पुरुषों की हत्या करके, महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म करना और राज्य पुलिस की मौजूदगी में यह सब होना स्पष्ट करता हैं की मणिपुर में संवैधानिक शासन प्रशासन पूर्ण रूप से विफल हो चुका हैं।

पार्टी का कहना है की, देश की खुफिया एजेंसी, राज्य की खुफिया एजेंसी, सत्ताधारी दल का संगठन तंत्र, विधायक, संसद और पुलिस का अपना खबरी तंत्र रहते हुए ऐसा नहीं माना जा सकता की इतनी बड़ी दुर्घटनाएं राज्य और केंद्र सरकार की जानकारी के बगैर हो रही हैं। इसलिए जो सरकार इन घटनाओं में षड्यंत्रकारी जैसी भूमिका में नजर आ रही है, उससे न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती और न ही असली षड्यंत्र का खुलासा हो सकता हैं।

पार्टी ने निवेदन किया है की, केंद्र सरकार को भी इस मामले में पक्ष मानते हुए मणिपुर शासन प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के नियंत्रण में दिया जाए।

जिला कलेक्टर को ज्ञापन देते समय नागपुर जिला इकाई के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित हुए। जिनमे पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) जिला इकाई, नागपुर के महासचिव मूलनिवासी तुषार मेश्राम, उपाध्यक्ष मूलनिवासी चरणदास यादव। साथ ही मू ० सुमित कोटांगले, मू ० रविकांत इलमकर, मू० आकाश जाधव, मू० अविष्कार कांबट्ठे, मू० रोहित कांबले, मू० रोहन उके और मू ० निशांत वांद्रे समेत कई लोग उपस्थित रहे।

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