मराठा जाति नहीं, महाराष्ट्र में सभी मराठा – बी डी बोरकर

B D Borkar on Maratha Reservation

मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के हाल ही के फैसले पर महाराष्ट्र में माहौल गर्म है। मराठा विरुद्ध अन्य पिछड़ा वर्ग अर्थात ओबीसी इनके बीच तणाव है। दूसरी तरफ एससी एसटी बनाम ओबीसी बनाम मराठा इस प्रकार का विवाद भी खडा किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का मूलनिवासी बहुजन समाज की एकजुटता पर क्या असर होगा? यह महत्वपूर्ण सवाल खड़ा हो गया है। यह भी समझना आवश्यक है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो निर्णय दिया गया है उसके पीछे क्या क्या सामाजिक और समसामयिक मुद्दे हैं? इस वक्त मराठा, ओबीसी और एससी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की क्या भूमिका होनी चाहिए इस बात को समझने के लिए एमएनटी न्यूज नेटवर्क पर मा. बी. डी. बोरकर (राष्ट्रीय अध्यक्ष, पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक) के साथ विस्तार से चर्चा की। वीडियो को आप MNT News Network के यूट्यूब अथवा फेसबुक पर देख सकते हैं। इस चर्चा में मू बी डी बोरकर साहब ने कई अनछुए एवं महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार रखें। उन्होंने सामाजिक, ऐतिहासिक, संवैधानिक कानूनी, आदि दृष्टिकोण से विषय पर समसामयिक बात स्पष्ट रूप से रखी। उनके साथ हुयी बातचीत का सारांश:

“मराठा कोई जाति नहीं है न ही मराठा किसी जाति की पहचान है। मनुस्मृति के अनुसार ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं वैश्य को छोड़कर सभी शूद्र ही है। इसी आधार पर समाज की मान्यता बनी हुई है। इसी कारण छ. शिवाजी महाराज को भी शूद्र कहते हुए उनको राजतिलक (राज्याभिषेक) नकारा गया था। इन्ही बातों को राष्ट्रपिता फूले जी ने बताते हुए ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं वैश्य बनाम शूद्राअतिशूद्र का आंदोलन खड़ा किया था। उन्होने शूद्रातिशूद्रों को भारत का मूलनिवासी बताया है।

छ.शिवाजी महाराज ने मराठा नाम से किसी को इकट्ठा नहीं किया था। (पुणे के) मावल क्षेत्र में विभिन्न शोषित पीडित जाति के मावलों को उन्होंने इकट्ठा किया था। मावल क्षेत्र की भाषा मराठी, उनका क्षेत्र महाराष्ट्र, और नेतृत्व भी मराठी इन कारणों से उन्हे मराठा सैनिक कहा गया। आज भी आम जनता में मराठा धोबी, मराठा कुणबी, मराठा तेली, मराठा कुम्हार कहने की प्रथा है। इससे यह प्रमाणित होता है कि जो मराठी बोलता है और जो महाराष्ट्र में रहता है वह मराठा होता है।

ज्यादातर मराठा मूल रुप से कुनबी (कुर्मी) है। डॉ. आ. ह. सालुंखे, दिवंगत न्या. पी. बी. सावंत, न्या. बी. जी. कोलसे-पाटील ऐसे सभी विचारवंतों का भी यही मत है। इस बात को समझा जाए तो कुर्मी ओबीसी है ही।

लेकिन मराठा आरक्षण की मांग करने वाले लोगों ने, या राणे समिती, या गायकवाड समिती ने इनमे से किसी ने भी इस इस तरह सामाजिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण को नहीं रखा। न ही न्यायालय में पक्ष रखने वाले राज्य सरकार या वकीलों ने इस सामाजिक पक्ष को रखा।

संविधान में किया गया आरक्षण का प्रावधान यह सामाजिक एवं शैक्षिक पिछड़ेपन एवं पर्याप्त प्रतिनिधित्व के आधार पर है। इसलिए यह सिद्ध करना निहायत जरूरी है कि, मराठा (जो कि कुनबी है) सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछडे है। और यह आसान भी है। क्योंकि तथाकथित मराठा यह ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य नही है। मराठा अनुसूचित जाति या जनजाति भी नही है। इसका मतलब वे ओबीसी ही है। जो मराठा है वह कुनबी (कुर्मी) ही है तथा इस देश का मूलनिवासी है और वह सामाजिक संरचना में ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य के नीचे है। अतः तथाकथित मराठों ने आरक्षण को लेकर इस तथ्य और तर्क के साथ जाना अनिवार्य है।

मराठा आरक्षण के मसले को लेकर ओबीसी में जो तनाव की स्थिती पैदा की गयी है उससे यह मामला मराठा बनाम ओबीसी के संघर्ष मे उलझ गया है। ब्राह्मणवादी समाज संरचना जो सत्ता संरचना पर हावी है, अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए अलग अलग पैंतरे लेकर इस मसले को सुलगाने में जुटी हुई है। इसलिए उन्होंने हमारे हाथ में हिंदुत्व अजेंडा थमाया और हमारा वे एक दुसरे के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे है। मराठा और ओबीसी भाइयों ने इस बात को समझना चाहिए और अपने आप को एससी, एसटी और धार्मिक अल्पसंख्याक के साथ मूलनिवासी पहचान के तहत इकठ्ठा होकर सत्ता में अपनी हुकूमत स्थापित करने दिशा में पहल करनी चाहिए।”

मू बी डी बोरकर साहब ने करीब एक घंटा उनका व्याख्यान दिया और बाद में दर्शकों के सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने अनेक विभिन्न बिंदुओं को छुआ। जैसे कि संविधान के प्रावधान, संविधान सभा की चर्चा, आरक्षण की राजनीति, कानून और हमारा अज्ञान, आरक्षण को 50% की सीमा और उसका हाइपोथिसिस, सुप्रीम कोर्ट का सवर्णों के प्रति झुकाव, संविधान सुधार और उसकी राजनीति, मूलनिवासी बहुजन एकजुटता के लिए आंदोलन की अनिवार्यता एवं प्रक्रिया आदि. मुद्दों पर चिंतनशील तथा विस्तार से अपनी बात को रखा। यह पूरी चर्चा और सवालों के जवाब को आप नीचे दी हुई लिंक पर देख सकते हैं।

इसके साथ ही MNT News Network पर सुप्रीम कोर्ट के प्रख्यात एडवोकेट डॉ के एस चौहान इनके साथ भी विस्तार से बातचीत हुई। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिनको मराठा कहा जा रहा उन्हें आरक्षण प्राप्त हो सकता है। लेकिन उसकी कुछ शर्तें है उसे पूरा करना होगा। 50 प्रतिशत की सीमा हटाने के लिए पहल की आवश्यकता है। डॉ के एस चौहान के साथ पूरी बातचीत का वीडियो नीचे दी हुई लिंक पर देख सकते हैं।

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  1. खूप महत्वाची माहिती… धन्यवाद साहेब…🙏 धन्यवाद MNT 🙏

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