जिहां, यह तस्वीर निश्चित ही एक मीटिंग की है। देश की राजधानी दिल्ली में आंध्रा भवन में हुए एक मीटिंग की यह तस्वीर है। 25 जुलाई रविवार को दिल्ली में अन्य पिछड़े वर्ग के बुद्धिजीवियों की यह बैठक हुयी। ओबीसी के कुछ संगठन और नेता इक्कठा हुए। इस राउंड टेबल मीटिंग में सभी ओर से यह भारी जमावड़ा। उनके चेहरे पर निराशा, अस्वस्थता और गुस्सा देखा जा रहा था।
राष्ट्रीय ओबीसी आयोग के पूर्व चेयरमैन और आंध्रा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस रह चुके न्यायमूर्ति ईश्वरैया की उपस्थिति इस मीटिंग में रही। इससे इस मीटिंग के मुद्दों की गंभीरता को आप समझ सकते हैं।
ओबीसी ने बार-बार मांग करने के बावजूद भी जनगणना में जातिगत जनगणना न किये जाना, ओबीसी को नीट के केंद्र के कोटे में आरक्षण न देना, प्रमोशन में आरक्षण को लेकर खड़ी की गयी समस्याएं, पंचायत राज के चुनावों में ओबीसी के कोटे को लेकर उठाये गए सवाल, सरकारी संस्थानों का धड़ल्ले से हो रहा निजीकरण, ऐसे कई मामले है जिससे ओबीसी परेशान है।
जानकारी के अनुसार रविवार दिल्ली में हुए इस बैठक में इस बात चर्चा हुयी कि ओबीसी के संवैधानिक अधिकारों को लेकर ओबीसी का राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन खड़ा किया जाए।
उत्तर प्रदेश से अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ जी सिंह कश्यप जो इस मीटिंग में सहभागी थे, उहोंने अपने फेसबुक पर लिखा है कि इस मीटिंग में ओबीसी संगठनों का एकजुटान हुआ सभी को मिलकर एक सोशल रेवोलुशन अलायंस (एसआरए) का गठन किया गया। ओबीसी से जुड़े 9 मुद्दों पर इस मीटिंग में विस्तार से चर्चा हुयी और एक्शन प्लान बनाया गया।
बामसेफ की ओर से बामसेफ के राष्ट्रीय संगठन सचिव मू सुरेश द्रविड़ भी इस बैठक में उपस्थित रहे।
आपको बता दें कि इस मीटिंग में जाति आधारित जनगणना, ओबीसी को आबादी के हिसाब से आरक्षण, आरक्षण पर लगी 50 प्रतिशत की सीलिंग, क्रीमीलेयर की समाप्ति, एमएसपी, नीट आदि मुद्दों पर मीटिंग में चर्चा हुयी।
मिली खबर के अनुसार जस्टिस वी ईश्वरैया के साथ इस मीटिंग में शामिल नेताओं ने आज सोमवार 26 जुलाई को राष्ट्रीय ओबीसी आयोग को ज्ञापन भी दिया है।










