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बहुत खुशी हुई है ,हालांकि 800 से अधिक किसान शहीद हो गए है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा कर दी है कि तीनों कृषि संबंधित कानून वापस होंगे, 800 किसानों की शहादत के बाद बहुत खुशी की लहर है लेकिन एक चिंता की भी बात है यह खुशी की लहर व्यवस्था परिवर्तन की बात कब करेगी ? क्या हम इसी खुशी में नाचने लग जाएंगे ? अब इस आंदोलन का क्या होगा ? क्या एमएसपी मिलेगी ? क्या कृषि से जुड़े सभी विभाग जिंदा रहेंगे ? क्या सभी विभागों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे ? क्या आने वाले समय में भारतीय संविधान के अनुसार ही कानून बनाए जाएंगे ? क्या संविधान विरोधी बनाए गए सभी कानूनों को वापस लिया जाएगा ? मजदूर विरोधी बनाए गए कानूनों, श्रम कानूनों को भी क्या वापस लिया जाएगा ? ओबीसी को संख्या के अनुपात में क्या उचित प्रतिनिधित्व मिल पाएगा ? किसान आंदोलन का आगे का स्वरूप क्या होगा ? इसके अतिरिक्त भी ढेर सारे सवाल लोगों के दिल दिमाग में हो सकते हैं, जिन पर अब चर्चा शुरू हो जाएगी या चर्चा शुरू हो गई है या चर्चा चलेगी।
देशभर के 600 से अधिक संगठन एक साथ तथा राष्ट्रीय स्तर के 40 से अधिक संगठनों ने एक साथ मिलकर जो भूमिका निभाई उसके जितनी तारीफ की जाए वह कम है, इस लंबे संघर्ष के लिए उनका बहुत-बहुत धन्यवाद । इस लंबे संघर्ष में साथ देने वाली जनता का भी बहुत-बहुत धन्यवाद। इस लंबे संघर्ष में किसान और मजदूर जातियों के मध्य आपसी सामंजस्य /तालमेल स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाने वाली बामसेफ और उसके सभी आफसुटस विंगों का भी बहुत-बहुत धन्यवाद। बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मान्यवर एन गंगाधर जी का भी बहुत-बहुत धन्यवाद ,जिन्होंने इस किसान आंदोलन में बामसेफ संगठन के साथियों को भागीदारी करने की स्वीकृति दी। बामसेफ संगठन के साथियों ने किसान और मजदूरों के मध्य आपसी तालमेल और सामंजस्य बिठाने का बहुत ही महत्वपूर्ण काम किया, हालांकि बहुत से मजदूर जातियों से संबंध रखने वाले दलाल और भड़वे लोगों ने इस आंदोलन को बिगाड़ने की कोशिश की तथा आर एस एस और भाजपा के इशारे पर नाच नाच कर किसान और मजदूर जातियों के मध्य उत्तेजना पैदा कर ,संप्रदायिक दंगे करवाने की साजिशें भी रची,लेकिन इन साजिशों को बामसेफ संगठन के साथियों ने बेनकाब किया और किसान और मजदूरों के मध्य आपसी भाईचारा स्थापित किया । फूले अंबेडकरी आंदोलन के इन साथियों ने दीनबंधु सर छोटू राम और बाबा साहब अंबेडकर की विचारधारा को बड़े पैमाने पर समाज में स्थापित किया। इस विचारधारा का यह परिणाम हुआ कि आज किसान और मजदूर दोस्त और दुश्मन की पहचान करने लगे । आज किसान जातियां बाबासाहेब अंबेडकर को अपने घरों में स्थान देने लगी, वहीं मजदूर जातियां दीनबंधु सर छोटू राम को अपने घरों में स्थान देने लगी, यह बहुत बड़े बदलाव का प्रतीक है। सबसे बड़ी जीत यही हमारी जीत है जो आने वाले समय में व्यवस्था परिवर्तन का महत्वपूर्ण कार्य करेगी।
मैं बहुत ही चिंतित था क्योंकि हरियाणा और पंजाब इस आंदोलन का मुख्य गढ़ रहे है । हरियाणा में किसान और मजदूरों के बीच संघर्ष आपसी लड़ाई लगाने के बहुत सारे प्रयास किए गए , इसमें हालांकि किसान जातियों के लोगों ने भी कई जगह नकारात्मक भूमिका निभाई ,वहीं अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों से जुड़े दलाल लोग भी बड़े पैमाने पर शामिल दिखाई दिए लेकिन हमने समय-समय पर हरियाणा की जनता को जागरूक करने का प्रयास किया, हरियाणा की जनता ने इसको समझा तथा आपसी संघर्ष से बचें, इसके लिए किसान नेतृत्व करने वाले साथियों का भी धन्यवाद ,उन्होंने भी बड़े पैमाने पर अपनी स्कारात्मक भूमिका निभाकर जातियों के आपसी संघर्ष से बचाव किया, और हर कदम पर सावधानी बरतकर समाज को जागरूक किया ।
आर एस एस और भाजपा से जुड़े तकनीकी टीम के लोगों ने हमारे बहुत सारे वीडियो डिलीट करवाएं ,बहुत सारे संदेश रुकवाये लेकिन फिर भी हमने किसान और मजदूरों के बीच आपसी भाईचारा स्थापित करने के प्रयास कम नहीं किए। आज यह किसानों के साथ साथ हमारी भी सबसे बड़ी जीत है, बल्कि यूं कहिए कि यह हमारी ही जीत है क्योंकि हमनें जनता के सभी घटकों के बीच समाज में संतुलन और उचित तालमेल बनाने का काम तथा प्रयास बखूबी किया है।
किसानों को इस देश के मीडिया ने बड़े पैमाने पर बदनाम करने की कोशिशे की लेकिन किसानों की अत्यधिक सावधानी से वे बदनामी से बचते रहे ,क्योंकि किसान इस आंदोलन को दिल से लड़ रहे थे। इस आंदोलन से देश में संविधान बचाओ, किसान बचाओ, देश बचाओ का नारा भी मजबूत हुआ। किसानों में जगह-जगह बाबा साहब अंबेडकर की जयंती मनाई तथा अपने धरना स्थल पर दीनबंधु सर छोटूराम जी के साथ-साथ बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा अभी लगाई।
इस किसान आंदोलन से देश में एक नई बहस भी शुरू हुई कि देश में कृषि संबंधी नीतियां क्या हो,कैसे हो ? इन नीतियों में बाबा साहब अंबेडकर की कृषि नीति, दीनबंधु सर छोटूराम की कृषि नीति ,सरदार वल्लभ भाई पटेल की कृषि नीति ,राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले की कृषि नीति, छत्रपति शाहू महाराज की कृषि नीति, रामस्वरूप वर्मा की कृषि नीति, शहीद भगत सिंह की कृषि नीति ,जगदेव प्रसाद कुशवाहा के कृषि नीति ,पैरियार साहब की कृषि नीति आदि अनेक कृषि नीतियों के संबंध में चर्चा आरंभ हुई । आने वाले समय में निश्चित ही हम इन महापुरुषोंकी विचारधारा और कृषि नीतियों का अनुसरण कर देश में एक अच्छी कृषि नीति बना पाएंगे।
यह किसान आंदोलन मजदूरों के लिए भी प्रेरणा बना है । आज मजदूरों को भी बड़े पैमाने पर एक साथ इकट्ठा होने की जरूरत है तथा मजदूर विरोधी कानूनों को वापस करवाने की जरूरत है, जो श्रम कानून मजदूरों के हित में थे जिन्हें पहले कांग्रेस ने अच्छे तरीके से लागू नहीं किया तथा वर्तमान भाजपा सरकार ने खत्म ही कर दिया और उनके विरोध में संविधान विरोधी श्रम कानून बनाए ,इन श्रम कानूनों के खिलाफ भी एक बड़ी जंग लड़ने की आवश्यकता है। अन्य पिछड़े वर्ग से संबंध रखने वाले लोग बड़े पैमाने पर किसान हैं, अन्य पिछड़ा वर्ग 1931 की जनगणना के अनुसार इस देश में 52% था, जिसकी संख्या में और अधिक बढ़ोतरी हुई होगी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने से पहले यह वादा किया था, कि वे जाति आधारित जनगणना करवा कर अन्य पिछड़े वर्ग को 52% हिस्सा देंगे । आज किसान आंदोलन से प्रेरणा लेकर के ओबीसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह पूछना चाहिए कि इस कार्य में देरी क्यों की जा रही है ? आज ओबीसी को इस किसान आंदोलन की तरह एक बड़ा आंदोलन छेड़ने की जरूरत है । मुझे उम्मीद है यह किसान आंदोलन मूलनिवासी बहुजन समाज के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा का काम करेगा, उत्साह का संचार करेगा। हम जीतेंगे और आगे बढ़ेंगे।
तीनों कृषि कानूनों की वापसी की प्रधानमंत्री की घोषणा पर आप सभी को पुनः हार्दिक बधाई और मंगल कामनाएं।
जय भीम,जय मूलनिवासी।
सुरेश द्रविड़
राष्ट्रीय संगठन सचिव, बामसेफ








