किसान संगठनों के धरना प्रदर्शन को अब लगभग एक वर्ष होने को आ रहा है। किसान अपनी मांगो को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान पर अपना धरना प्रदर्शन करना चाहते थे। लेकिन उन्हें दिल्ली बॉर्डर पर रोका गया। किसानों ने अन्य रास्तों से से दिल्ली में प्रवेश करना चाहा लेकिन लगभग सभी रास्तों से दिल्ली के रामलीला मैदान पर प्रवेश बंद किया गया। नतीजन किसान दिल्ली बॉर्डर पर रुक गए।
केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान लगभग पिछले साल नवंबर माह से प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों का पिछले एक साल से विरोध जारी हैं।
अब यह बात देश के उच्चतम न्यायालय में पहुंची है। लेकिन मीडिया में यह बताया जा रहा है की दिल्ली की सीमाओं पर सड़कें किसानों के आंदोलन के चलते लंबे समय से बंद है।
किसान आंदोलन के चलते बंद रास्ते को खुलवाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है लेकिन सड़कों को अनिश्चित काल के लिए अवरुद्ध नहीं किया जा सकता।
आपकों बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सड़कें बंद किए जाने को लेकर किसान संगठनों से जवाब मांगा है।
इस वक्त कुछ संगठनों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे ने दलील प्रस्तुत की कि सड़कों को किसानों द्वारा नहीं बल्कि पुलिस द्वारा बंद किया गया है।
किसानों को रामलीला मैदान में धरना देने के लिए जगह देने की बात का पुरजोर समर्थन करते हुए दुष्यंत दवे ने कहा कि “मुझे लगता है कि दिल्ली पुलिस द्वारा बेहतर व्यवस्था की जा सकती है। हमें रामलीला मैदान आने की अनुमति दें।”
उधर किसान संयुक्त मोर्चा ने भी बयान जारी किया है, ‘किसान भाइयों, यह अफवाह फैलाई जा रही है कि गाज़ीपुर बॉर्डर खाली कराया जा रहा है। यह पूरी तरह से निराधार है, हम यह दिखा रहे हैं कि सड़क को दिल्ली पुलिस ने बंद किया है, किसानों ने नहीं।’
विरोध कर रहे किसानों को सड़कों से हटाने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने, संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संघों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले पर आनेवाले सात दिसंबर को अगली सुनवाई होगी।








