पैकेज्ड फूड पर चेतावनी की जगह स्टार रेटिंग, क्या कंपनियों को बचाने का रास्ता?

देश में एफएमसीजी अर्थात फ़ास्ट मूविंग कंजूमर गुड्स में पैकेज्ड फूड अर्थात डिब्बा या पैकेट में बंद खाद्यपदार्थों की बिक्री का कारोबार तेजी पर है। कई नामीगिरामी देशी विदेशी कंपनियां अरबों रुपयों की कमाई कर रहे हैं।

पैकेज्ड फूड पर हमेशा सवाल उठाये गए हैं। पैकेज्ड फूड पर यह आरोप लगाया जाता है कि इसमें इस्तेमाल पदार्थों से स्वास्थ्य की समस्यांएं निर्माण होती है। दलील यह दी जाती है कि खानेवालों को यह पता नहीं चलता पैकेज्ड फूड पर इस्तेमाल पदार्थ उनके सेहत के लिए कितना उपयुक्त या हानिकारक है।

इसीको लेकर विश्वभर से यह मांग उठी की पैकेट बंद खाद्यपदार्थों पर चेतावनी छापी जानी चाहिए। खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल शूगर, फैट, नमक, आयोडीन या अन्य तत्त्व जिसका सेहत पर असर होता है उसके बारे में पैकेट पर लिखा जाने के बारे में विश्वभर से आवाज उठ रही है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन अर्थात डब्ल्यू एच ओ ने भी खाद्य पदार्थ में शुगर, फैट, आयोडीन जैसे तत्वों की मात्रा फूड पैकेट पर लिखने को कहा है।

इसके पीछे तर्क यह है कि खानेवालों को पता चलेगा की कौनसा पैकेट फूड उसके लिए ठीक है और कौनसा ठीक नहीं है।

खबर यह है कि भारत की खाद्य संरक्षा के मामलों को देखने वाली भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI एफएसएसआई) ने पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर इस प्रकार की चेतावनी की जगह हेल्थ स्टार रेटिंग लाने की हिमाकत कर रही है।

इस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया आई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्टार रेटिंग से यह नहीं पता चलेगा कि प्रोडक्ट में नमक, शुगर या फैट मानक से अधिक है। यह भी बताया जा रहा है कि हेल्थ स्टार रेटिंग से कंपनियों के लिए बचाव का रास्ता बनाया जा रहा है। कंपनियां नुकसानदेह खाद्यपदार्थों में प्रोटीन और फाइबर जैसी बातों को बढ़ाकर अच्छी स्टार रेटिंग पा सकते हैं । जिसके आड़ स्वास्थ्य हानिकारक पदार्थों को नजरअंदाज किया जा सकता है।

एक गैर सरकारी संस्था से जुड़े स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है कि फूड पैकेट पर वार्निंग लेबेल जरूरी है, क्योंकि इससे उपभोक्ता को पता लगता है की वह जो पदार्थ खरीद कर कहा रहा है उसमें किसकी कितनी मात्र है और वह उसके स्वास्थ्य के लिए हितकारक है या हानिकारक।

आपको बता दें कि भारत में फ़ास्ट मूविंग कंजूमर गुड्स की नीति के तहत पैकेज्ड फूड को बड़ा कारोबार देखा जा रहा है वहां उपभोक्ताओं में इसकी जानकारी तक नहीं है वे जो खा रहे हैं उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक है या नहीं। आपको यह भी बता दें कि एफएमसीजी मार्केट के सामने बच्चे बहुत बड़ा खरदीदार है।

विशेषज्ञों में एक वर्ग यह भी है कि जिनका कहना यह है कि पैकेज्ड फूड पर स्टार रेटिंग, चेतावनी, न्यूट्रीशन वैल्यू साफ लिखा हो। लेकिन इसके लिए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण और मजबूत करना होगा।

अगर आपने को यूट्यूब पर एमएनटी न्यूज नेटवर्क को सबस्क्राइब और बेल आइकॉन को ऑन नहीं किया है तो कृपया अभी करें। साथ ही हमारे फेसबूक पेज को लाइक और फॉलो करें।

===
एमएनटी न्यूज नेटवर्कफेसबूक पेज को लाइक करें

===
एमएनटी न्यूज नेटवर्क यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें और बेल आइकॉन को ऑन करें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here