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जिस तरह देश में बेरोजगारी, अशिक्षा, बढ़ती मंहगाई और खराब स्वास्थ्य व्यवस्था एक अहम मुद्दा है ठीक उसी तरह गरीबी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। आज हम मुख्य रूप से बात करेंगे गुजरात राज्य के बीपीएल धारकों की जिनकी संख्या घटने के बजाय और अधिक बढ़ती जा रही हैं। मतलब गरीबी घटने के बजाय और अधिक बढ़ रही हैं।
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यह कहना गलत नहीं होगा की इस समय गुजरात राज्य की एक तिहाई आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही हैं, क्योंकि ग्रामीण विकास राज्य मंत्री के मुताबिक गुजरात में कुल इकतीस लाख इकसठ हजार तीन सौ दस (31,61,310) बीपीएल परिवारों की पहचान की गई है।
अब इन इकतीस लाख इकसठ हजार तीन सौ दस बीपीएल परिवारों में औसतन सदस्यों की संख्या छह मान लिया जाए तो गुजरात में बीपीएल आबादी कुल एक करोड़ नवासी लाख (1,89,00000) हो जाती हैं और यह आबादी राज्य की कुल आबादी का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं।
आंकड़ों के अनुसार इकतीस लाख इकसठ हजार तीन सौ दस (31, 61,310) बीपीएल धारकों में सौलह लाख अठाईस हजार सात सौ चौवालीस (16,28,744) परिवार बेहद ग़रीब हैं। जबकि पंद्रह लाख बत्तीस हजार पांच सौ छियासाठ (15,32,566) परिवार ग़रीब की श्रेणी में हैं।
बताते चले की आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में बीपीएल श्रेणी में परिवारों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में घटने के बजाय और अधिक बढ़ रही है।
आंकड़ों के मुताबिक साल दो हजार बीस – इक्कीस में एक हजार सैंतालीस (1,047) परिवार बीपीएल श्रेणी में आ गए थे और इस साल केवल चौदह परिवार इससे बाहर निकल पाए।
इसी प्रकार साल दो हजार बाइस – तेईस में बीपीएल श्रेणी में एक हजार सात सौ इक्यावन ( 1,751 ) नए परिवार बीपीएल श्रेणी में आ गए। जबकि इस साल केवल दो परिवारों की स्थिति में सुधार हुआ और वे बीपीएल श्रेणी से बाहार निकल पाए।
जबकि साल दो हजार बाईस – तेईस में बीपीएल श्रेणी में तीन सौ तीन (303) परिवारों की वृद्धि देखी गई और इस बीच केवल एक परिवार गरीबी रेखा से ऊपर उठ पाया।
यह आंकड़े दर्शाते है की पिछले तीन वित्तीय वर्षो, जिनमे वर्ष दो हजार बीस -इक्कीस ( 2020-21), दो हजार इक्कीस – बाइस (2021-22) और दो हजार बाईस – तेईस (2022-23) शामिल है। इन वर्षों में गरीबी घटने के बजाय और अधिक बढ़ी हैं।







