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पेगासस जासूसी आरोपों को लेकर देश की मीडिया में घमासान मचा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पेगासस जासूसी आरोपों को नकारते हुए इसे देश विरोधी साजिश बताया है।
हालांकि केंद्र सरकार को यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या भारत सरकार एसएसओ ग्रुप की क्लाइंट है या नहीं?
सभी को अब पता चला है कि पेगासस यझ एक स्पाइवेयर अर्थात जासूसी साफ्टवेयर है। इस सॉफ्टवेयर को इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ ने बनाया है। इसका दूसरा नाम क्यू-सुईट भी है। यह सॉफ्टवेयर सरकारों को भी बेचा जा सकता है।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने पेगासस स्पाइवेयर के कथित जासूसी की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र जांच की मांग की है। गिल्ड ने अपने ट्विटर पर इस बारे में अपना आधिकारिक बयान साझा किया है।
मीडिया रिपोर्टस के नौसार फ्रांस ने पेगासस के इस पूरे मामले में जांच करने की घोषणा की है। साथ ही कई देशों में इसके गलत रिपोर्ट आने के बाद पेगासस स्पाइवेयर के दुरुपयोग के आरोपों की जांच करने हेतु इसराइल सरकार ने जांच के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया है।
कथित मामले को लेकर जांच की मांग करते हुए एक अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। कथित पेगासस मामले को लेकर कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।
पेगासस जासूसी मामले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को मीडिया से चर्चा में कहा कि छत्तीसगढ़ में भी कुछ लोगों की जासूसी हुई है, इसकी जांच होनी चाहिए। यह प्रजातांत्रिक देश है। पेगासस जासूसी मामले में मुख्यमंत्री ने चार सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है।
शिवसेना के मुखपत्र दैनिक सामना के संपादकीय में सुप्रीम कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेकर एक स्वतंत्र समिति नियुक्त करने के बारे में मत व्यक्त किया है।
आपको बता दें कि पेगासस सॉफ्टवेयर के बारे में लीक हुए आंकड़ों के आधार एक वैश्विक मीडिया संघ द्वारा पर की गयी जांच के बाद यह दावा किया गया है की विश्वभर से 50 हजार से अधिक सेलफोन नम्बर है जिनके सेलफोन पर इस सॉफ्टवेयर द्वारा निगरानी हो रही है या की गयी है। बताया जा रहा है कि उसमें 300 से ज़्यादा नंबर भारतीय लोगों के हैं।
द वायर के अनुसार डेटाबेस में 40 पत्रकार, तीन विपक्ष के बड़े नेता, एक संवैधानिक पदासिन व्यक्ति, मोदी सरकार के दो मंत्री और सुरक्षा एजेंसियों के मौजूदा और पूर्व प्रमुख समेत कई बिजनेसमैन शामिल हैं।
पेरिस स्थित एक गैर-लाभकारी और पत्रकारिता संबंधी संस्था ‘फॉरबिडन स्टोरीज” एवं मानवाधिकार समूह “एमनेस्टी इंटरनेशनल” द्वारा यह जानकारी हासिल की गई और 16 समाचार संगठनों के साथ साझा की गई। इन्होने एक रिपोर्ट सामने लायी है। इस जानकारी की पड़ताल कर रिपोर्ट प्रकाशित करने में द गार्डियन, वॉशिंगटन पोस्ट, द वायर, फ़्रंटलाइन, रेडियो फ़्रांस जैसे 16 मीडिया संस्थान शामिल है।
इनकी रिपोर्ट के अनुसार भारत में भी कथित रूप से विपक्ष के कई नेताओं के मोबाइल फ़ोन में इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से निगरानी की गयी। विपक्षी नेताओं के साथ कुछ मंत्री, पत्रकार, न्यायाधीश या उनके बारे में जुड़े मामलों के लोग, मानवाधिकार कार्यकर्ता के नाम सामने आये है।
दावाकर्ताओं ने कहा है कि मिली सूचि से विश्वभर के 67 फोन की फॉरेन्सिक जांच की गई। इसमें से 23 फोन हैक मिले, जबकि अन्य 14 में घुसपैठ की कोशिश की पुष्टि हुई। इस मीडिया शोध रिपोर्ट में शामिल ‘द वायर’ ने खुलासा किया है कि भारत में भी दस फोन की फॉरेन्सिक जांच करवाई गई। ये सभी या तो हैक हुए थे, या फिर इनकी हैकिंग का प्रयास किया गया था।
बताया जाता है कि पेगासस एक ऐसा जासूसी सॉफ्टवेयर है जो किसी के स्मार्टफोन में इंस्टाल होने के बाद उसके फोन कॉल, टेक्स्ट मेसेज, ईमेल, ऑडियो वीडियो डॉक्यूमेंट फ़ाइल, माइक्रोफ़ोन, कैमरा, सभी पर निगरानी कर सकता है अर्थात देख, पढ़ और सून सकता है। पेगासस सॉफ्टवेयर को डिजिटल जासूसी के क्षेत्र में अचूक बताया जा रहा है।








