लड़का लड़की जन्म पंजीकरण में लड़कों की संख्या अधीक।

बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ का नारा देती हैं। लेकिन सरकार लैंगिक असमानता को कम करने में अब भी विफल रही हैं। आज भी इस देश में बेटियों से अधिक बेटों को महत्व दिया जा रहा हैं। भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा तैयार किए गए ऑंकड़ो के अनुसार बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र और राजस्थान में दो हजार बीस में लड़कियों की तुलना में लड़कों के जन्म के पंजीकरण में बहुत अधिक अंतर दर्ज किया गया।

लड़कियों की संख्या पंजीकृत किए गए लड़कों से लगभग चार प्रतिशत कम है। रिपोर्ट में इन राज्यों के आंकड़े भी साझा किए गए हैं।

आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष दो हजार बाईस में बिहार में प्रति लाख जनसंख्या में लगभग सौलह सौ लड़कों के जन्म की तुलना में लगभग चौदह सौ तियालीस ही लड़कियों का जन्म पंजीकृत किया गया हैं। गुजरात में लगभग पांच सौ सतहत्तर लड़कों के जन्म की तुलना में पांच सौ पच्चीस लड़कियों का ही जन्म पंजीकृत किया गया । हरियाणा में तीन सौ नौ लड़कों के जन्म की तुलना में दो सौ बिरासी लड़कियों का ही जन्म पंजीकृत किया गया। वही झारखंड की बात करे तो झारखंड में तीन सौ उनचालीस लड़कों के जन्म की तुलना में तीन सौ नौ लड़कियों का जन्म पंजीकृत किया गया और महाराष्ट्र में आठ सौ पंचानवे लड़कों के जन्म की तुलना में आठ सौ सतरह लड़कियों का जन्म पंजीकृत किया गया। वही उत्तर प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या में पच्चीस सौ चौबीस लड़कों के जन्म की तुलना में मात्र तेईस सौ तीस लड़कियों का जन्म पंजीकृत किया गया हैं। राजस्थान में नौ सौ सत्तर लड़कों के जन्म की तुलना में आठ सौ बीराणवे लड़कियों का जन्म दर्ज किया गया हैं।

आपको बता दें कि भारत को महिलाओ के लिए गंभीर देश के रूप में देखा जा रहा है। महिलाओं के मुद्दों पर करीब साढ़े पांच सौ विशेषज्ञों की राय के बाद ‘थॉमसन रायटर्स फाउंडेशन’ के सर्वे के अनुसार भारत महिलाओं के लिए गंभीर देश है। इस सूची में सोमलिया और सउदी अरब जैसे देश चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। जबकि भारत पहले स्थान पर।

बताते चलें कि रजिस्ट्रार जनरल की रिपोर्ट ‘वर्ष दो हजार बाईस के लिए नागरिक पंजीकरण प्रणाली पर आधारित महत्वपूर्ण सांख्यिकी’ में कहा गया है कि भारत में दो हजार बीस में कुल दो करोड़ बयालीस लाख बाईस हजार चार सौ चौवालीस (2,42,22,444) बच्चों के जन्म पंजीकृत किए गए, जिनमें से एक करोड़ पच्चीस लाख छियानवे हजार सात सौ (1,25,96,700) (52 फीसदी) लड़के और एक करोड़ सौलह लाख चौबीस हजार नौ सौ तेतीस ( 1,16,24,933) (48 फीसदी) लड़कियां हैं।

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