अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष याने IFM की प्रबंधक निदेशक किस्टलिना जार्जिवा ने कोरोना से बचने के लिए भारत सरकार ने किए उपायों पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। जार्जीव ने IMF और विश्व बैंक की वार्षिक आम बैठक के दौरान बुधवार को एक संवाददाता बैठक में केंद्र की मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने दो प्रतिशत राजकोषीय उपाय किए और गारंटी के रूप में 4 प्रतिशत राहत। लेकिन प्रत्यक्ष रूप से राजकोषीय उपाय नहीं किए।
उन्होंने कहा कि हमारे पास स्वास्थ्य संकट से निपटने का कोई रास्ता नहीं है। हमें कठिनाइयों, अनिश्चितता और समान सुधार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा, अच्छी तरह से लक्ष्यित सहायता, छोटे और मझोले उद्योगों की रक्षा करना सरकार की जवाबदेही है।
IFM ने ये भी कहा की भारत ने बुनियादी मुद्दों पर काम किया, लेकिन समस्यायें हल करने में वे असफल रहें। जिससे भारत में क़रीब एक लाख से ज़्यादा लोगों की कोरोना से मौत हुई।
जार्जीवा ने रेखांकित किया कि इस साल भारत में बेहद आश्चर्यजनक रूप से JDP में 10 प्रतिशत का संकुचन देखने को मिला। जिससे भारत की जीवंत अर्थव्यवस्था मर चुकी है।







