आईआरसीटीसी के तरफ से भेजा गया सिख समुदाय से संबंधित सन्देश।

किसान आंदोलन के वक्त ही भेजे गए सन्देश से उठे सवाल?
बड़े समाचार पत्रों ने छापा 2 करोड़ सिख समुदाय को भेजा गया सन्देश।
क्या निजी जानकारी का हो रहा है दुरुपयोग?

किसान आंदोलन का दबाव बढ़ता जा रहा है। किसानों की मांग है की सरकार तीन कृषि कानून और एक बिजली कानून रद्द करें। सरकार का कहना है की यह किसानों के हित में है। किसानों का कहना है की कानून किसानों के हित में नहीं है।

आपको बता दें इस किसान आंदोलन में दिल्ली से सटे पंजाब और हरियाणा के किसान बढ़ चढ़ कर सहभाग लेकर नेतृत्व कर रहे हैं। पंजाब राज्य से तथा सिख धर्म को मानने वाले लाखों लोग  किसानों के समर्थन में खुलकर खड़े हो रहे हैं।

इसी बिच हाल ही में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री – फिक्की के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था की कृषि कानून किसानों के हित में है। जिसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसान आन्दोलन के समर्थक टिका कर रहे है।

इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी के साथ साथ रेलमंत्री और आईआरसीटीसी (इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन) को भी टिका का सामना करना पड़ रहा है।

वजह यह है की आईआरसीटीसी की तरफ से कथित रूप से 2 करोड़ सिख समुदाय के लोगों को ईमेल भेजा गया है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया, द हिन्दू इन बड़े अखबारों समेत कई अखबारों ने इस खबर को प्रकाशित किया है।

ट्विटर और फेसबुक पर इस ईमेल की स्क्रीन शॉट वायरल हो गयी है। इसे देखने से पता चलता है की “प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार का सिख समुदाय के साथ अटूट सम्बन्ध” इस ई-बुक के प्रचार के लिए यह भेजा गया है।

लेकिन इस ईमेल ने अब अलग मोड़ धारण किया है। क्योंकि लम्बे समय से चल रहे किसान आंदोलन के पार्श्वभूमि पर इस सन्देश को देखा जा रहा है। माना जा रहा है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को संभालने के लिए यह भेजा गया।

आईआरसीटीसी पर आरोप लगाया गया है की इसने निजी जानकारी का दुरुपयोग किया है। एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार और मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित रविश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है “सरकार अपने प्रचार के लिए आपकी दी हुई निजी जानकारियों का इस्तेमाल कर रही है। यही नहीं उन जानकारियों को हिसाब से आपकी पहचान समुदाय के आधार पर की गई है। ये भयानक रिपोर्ट है। क्या सरकार को ऐसा करना चाहिए?”

रविश कुमार ने आगे यह भी लिखा है की, “मुझे भी एक NRI सिख भाई ने मैसेज किया है कि IRCTC की तरफ़ से मेल आया है। वे काफ़ी नाराज़ हैं। इस लेख को पोस्ट करने के बाद कोई लोगों का मैसेज आया है कि वे सिख नहीं हैं लेकिन उन्हें भी ऐसा मेल आया है। दूसरे जिलों के लोगों को भी ईमेल गया है।”

आईआरसीटी की तरफ से मीडिया में यह स्पष्टीकरण दिया गया है की उसने किसी एक समुदाय विशेष को ईमेल नहीं भेजा है।

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