उत्तर प्रदेश में महिलाओं की असुरक्षा बढ़ी ?

महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों में यूपी आगे। सीएम योगी के दावों के विपरीत हैं NCW के आंकड़े।

इस बात से कोई असहमत नहीं हो सकता कि भारत में मूलनिवासी पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की स्थिति भी बहुत दयनीय है।

प्रत्येक राज्य में महिलाएं कई तरह के अन्याय, अत्याचार का हर पल सामना करती है। विशेष रूप से बीजेपी और कांग्रेस दोनों के शाषित राज्यो में महिलाओं की स्थिति काफी चिंताजनक हैं।

भले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने अपने राज्यो की सुरक्षा और लोगो की बेहतरी की झूठी वाह वाही करते हैं, लेकिन आंकड़े तो कुछ और ही हकीकत बयां करती हैं।

साल दो हजार इक्कीस में महिलाओं के खिलाफ अपराध के करीब इकतीस हजार मामले दर्ज किए गए। इन इक्कीस हजार मामलों में करीब आधे मामले अकेले उत्‍तर प्रदेश में ही दर्ज किए गए हैं।

नेशनल कमीशन फॉर वुमन के आंकड़ों के मुताबिक, साल दो हजार बीस की तुलना में दो हजार इक्कीस में महिलाओं के खिलाफ अपराध में लगभग तीस प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी हैं।

अगर साल दो हजार बीस की बात करें तो महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े कुल तेईस हजार सात सौ बाईस (23, 722) केस दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष यानी दो हजार इक्कीस में यही संख्‍या बढ़कर तीस हजार छह सौ चौरासी (30,684 ) तक पहुंच गई।

दर्ज मामलों में सबसे अधिक ग्यारह हजार तरह (11,013 ) मामले ‘राइट लिव विद डिग्निटी’ से जुड़े रहे। वही छह हजार छह सौ तेतीस ( 6633 ) डोमेस्टिक वॉयलेंस और चार हजार पांच सौ नवासी (4589) केस दहेज से जुड़े रहे।

जिस उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री महिला सुरक्षा की बात करते हैं वही इन अपराधों की लिस्‍ट में उत्‍तर प्रदेश सबसे ऊपर रहा। दो हजार इक्कीस में दर्ज की गईं लगभग इकतीस हजार शिकायतों में आधे से भी अधिक उत्‍तर प्रदेश से सामने आईं है जो पंद्रह हजार आठ सौ अठाईस (15,828 ) हैं । इसके बाद दिल्‍ली का नंबर आता है जहां पर तीन हजार तीन सौ छत्तीस (3336 ) शिकायतें आईं हैं। इसके बाद इस लिस्ट में महाराष्‍ट्र, हरियाणा और बिहार का नाम शामिल हैं।

कत्ल जैसे गंभीर मामलों में भी उत्तर प्रदेश की स्थिति काफी चिंताजनक हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक, दो हजार सौलह से दो हजार बीस तक उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा हत्याएं हुईं। इस दौरान अलग-अलग शहरों में बीस हजार आठ सौ सौलह लोगों का कत्ल हुआ। वही दो हजार सतरह से दो हजार उन्नीस तक यहां अपहरण के अंठावन हजार दो सौ बाईस मामले दर्ज हुए हैं।

उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहाँ घटने वाली घटनाएं लोगो को झकझोर कर रख देती हैं। आपको याद होगा कानपुर के बिकरु गांव की घटना जहाँ नामी अपराधी विकास दुबे को पकड़ने गयी पुलिस टीम के ऊपर दुबे के लोगो ने अंधाधुन गोलियां चलाई थी । जिससे नौ पुलिस वाले शाहिद हो गए थे।

एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़े बताती है कि साल दो हजार उन्नीस की तुलना में दो हजार बीस में आपराधिक मामलों में वृद्धि हुई हैं। दो हजार बीच में केवल यूपी संज्ञेय अपराधों के छियासठ लाख एक हजार दो सौ पचासी मामले दर्ज किए गए हैं।

संज्ञेय अपराध का मतलब ऐसे क्राइम से है, जिसमें गिरफ्तारी के लिए पुलिस को किसी भी वारंट की जरूरत नहीं होती है। इनमें आईपीसी के तहत दर्ज किए जाने वाले अपराधों की संख्या बयालीस लाख चौवन हजार तीन सौ छपन रही। वहीं विशेष स्थानीय कानून के तहत दर्ज किए गए मामले तेईस लाख से अधिक रही।

एमएनटी न्यूज नेटवर्क टीम के मू. सूरज ने इस जानकारी को इकठ्ठा किया है। मू. रमेश ने इस खबर का वीडियो रिकॉर्ड और एडिट किया है।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया कॉमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें। अगर यह जानकारी आपको महत्वपूर्ण लगती है तो कृपया वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें।

अन्य वीडियो, लेख और खबरों के लिए हमारी वेबसाइट www.mntnewsnetwork.com पर अवश्य पढ़ें। हमें यूट्यूब पर सबस्क्राइब करें और फेसबूक पर लाइक और फॉलो करें।

धन्यवाद।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here