पश्चिम बंगाल में बढ़ी जातीयता। बारह वर्षीय मूलनिवासी लड़के की मौत।

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मामला पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर का है जहा, लोढ़ा शाबर समुदाय से आने वाले बारह वर्षीय लड़के पर खाना चुराने का आरोप लगाते हुए भीड़ ने कथित तौर पर उन्हें शारीरिक यातनाएं दीं। जिसमे एक टीएमसी नेता भी शामिल हैं। आरोप है कि, राज्य में मूलनिवासियों को कई तरीकों से प्रताड़ित किया जाता हैं। वही आदिवासी अधिकार मंच ने भी इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं।

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मामला बीते सताइस सितंबर, दो हजार तेईस की है। जब पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले में यह घटना घटती हैं।

खबर के मुताबिक, खाना चुराने के आरोप में भीड़ के कथित हमले के बाद अनुसूचित जनजाति से आने वाले बारह वर्षीय मूलनिवासी लड़के की मौत हो गई।

लोढ़ा शाबर समुदाय से आने वाले बारह वर्षीय लड़के पर खाना चुराने का आरोप लगाते हुए भीड ने कथित तौर पर उन्हें शारीरिक यातनाएं दीं और उनका सिर मुंडवा दिया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

मृतक की पहचान सबांग के बोरोचारा गांव के निवासी सुभा नायेक के रूप में हुई है, जो लोढ़ा शाबर समुदाय से थे।

बताते चले की, लोढ़ा शाबर समुदाय को केंद्र सरकार द्वारा उन पचहत्तर ‘विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों’ में से एक में वर्गीकृत किया गया है। इन्हें अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिया गया है।

राज्य में इस विशेष जनजाति को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है और अपमानजनक रूप से उन्हें ‘आपराधिक जनजाति’ करार दिया जाता है।

घटना बीते बुधवार की है। जब खाना और खाने के बर्तन चुराने के शक में एक भीड़ इस मूलनिवासी लड़के के झोपड़ी में पहुंचती हैं और तलाशी लेती हैं। लेकिन उनलोगो को उसके घर से कुछ भी नहीं मिलता हैं। सबने यह मान लिया की उस लड़के ने कुछ नहीं चुराया हैं।

लेकिन इतने में तृणमूल कांग्रेस नेता मनोरंजन मल आते हैं और आक्रामक स्थानीय लोगों को मामले को अपने हाथ में लेने और संदिग्ध को सबक सिखाने के लिए उकसाते है।

इसके बाद मूलनिवासी लड़के को पकड़कर एक कमरे में ले जाया गया, जहां उन्हें शारीरिक यातनाएं दी गईं और उनका सिर मुंडवा दिया गया।

लोगो ने बताया की, कैसे मनोरंजन मल भी उसे फुटबॉल की तरह किक मार रहे थे। वह भूखा था, बार-बार पानी मांग रहा था। लेकिन मनोरंजन मल बार बार लोगो को ये कहकर उकसा रहे थे कि, लोढ़ा चोर होते हैं। उन्हें सबक सिखाया जाना चाहिए।

इसके अगले दिन यानी अठाईस सितंबर की सुबह मूलनिवासी लड़के का शव उनकी झोपड़ी के सामने पाया गया। उनके पूरे शरीर पर चोटों के निशान थे।

इस मामले को स्थानीय नेताओं ने आत्महत्या बताते की कोशिश की, लेकिन मृतक की मां बालिका नायेक दुख जताते हुए कहती है कि, ‘हमारे पास खेती करने के लिए जमीन नहीं है, खाने के लिए भोजन नहीं है, हम जहर क्यों रखेंगे?

उन्होंने आरोप लगाया की, हम शाबर छोटे जाति के हैं, इसीलिए नेता हमें फंसाते हैं और इस तरह मार देते हैं।

इस मामले को लेकर आदिवासी अधिकार मंच की नेता गीता हांसदा ने कहा कि, ‘लोढा शाबर समुदाय, जिससे मृतक सुभा नायेक आते थे, ने पिछले पंचायत चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को वोट नहीं दिया था, जिससे नाराजगी हो सकती है। जिसका बदला अब उन्होंने ले लिया है। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की हैं।

बताते चले की प्रदेश में यह समुदाय कई दशकों से प्रताड़ना का शिकार होता आया हैं। संविधान लागू होने के बाद भी सरकारों ने इन समुदायों के लिए ऐसा कुछ नही किया जिससे इनकी स्थिति सुधरे।

यह समुदाय पश्चिम मेदिनीपुर और झारग्राम जिलों में आर्थिक रूप से वंचित जनजाति माना जाता है।

यह समुदाय अपनी जीविका के लिए मुख्य रूप से जंगली जड़ें, कंद और खाने योग्य पत्तियां इकट्ठा करने और शिकार पर निर्भर होते है ।

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