कोरोना के आड़ में मरीज ठगी के शिकार

How to prevent from cyber crime in pandemic?

कई कोरोना मरीज और उनके परिजन इन दिनों ठगी के शिकार होने की खबरें आ रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और कालाबाजारी इसके पीछे प्रमुख कारण है।

नकली इंजेक्शन, महंगी दवाइयां, निजी अस्पतालों की बेहिसाब फीस इससे मरीज और परिजन त्रस्त और ठगे हुए महसूस कर रहे हैं। कोरोना की भयावह स्थिति का इस्तेमाल कर मरीजों और परिजनों को अब सोशल मीडिया के जरिये ठगा जा रहा है।

आपने सोशल मीडिया पर देखा होगा कि कई मरीज और उनके परिजन सोशल मीडिया पर अपना नाम पता और टेलीफोन सार्वजनिक करके ऑक्सीजन सिलेंडर, रेमडेसिवीर इंजेक्शन, प्लाज्मा, दवाइयां अस्पतालों में बेड आदि की मदद मांगते है। कई मामलों में मदद के लिए इस गुहार का उन्हें फायदा भी होता है, मदद मिल भी जाती है। लेकिन कई शिकायतें ऐसी भी आयी है कि उन्हें मदद के नाम पर फोन किया गया और खाते में पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए कहा गया। पैसा ट्रांसफर होते ही संपर्क बंद हो गया।

दिल्ली समेत कई राज्यों में इस प्रकार ठगी सामने आयी है। खासकर ऑक्सीजन सिलिंडर और रेमडेसिवीर इंजेक्शन के नाम पर कालाबाजारी करते हुए रुपये कमाने के कई मामले सामने आये हैं। पुलिस द्वारा जगह जगह कार्रवाई हो रही है। कई राज्यों में नकली रेमडेसिवीर पाए गए अस्पतालों पर  कार्रवाई हुई है। मरीजों और उनके  परिजनों की  असहायता का फायदा उठाते हुए उन्हें ठगा जा रहा है।

इसके जड़ तक जाने से पता चलता है कि सरकार की तरफ से ऐसी यंत्रणा की कमी दिखाई देती है जहां से मरीजों को अस्पताल में  बेड, ऑक्सीजन सिलेंडर, इंजेक्शन, दवाइयां आदि की जानकारी तुरंत मिलें। इसके लिए सरकार की तरफ से महानगर, जिला और तहसील स्तर पर हेल्पलाइन की जरूरत है। अगर ऐसा हुआ इस प्रकार के ठगों  को रोक लगायी जा सकती है। इस विषय पर आपके क्या विचार है कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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