अर्नब की रिहाई पर उठे सवाल !

एक इंटेरियर डिज़ाइनर को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए क़ैद रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्नब गोस्वामी को सूप्रीम कोर्ट ने ज़मानत दी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के पर अनेक प्रश्न उपस्थित किए जा रहे है। सुप्रीम कोर्ट बार असोसीएशन के अध्यक्ष दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिख कर पूछा कि रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी की याचिकाएं तुरंत सुनवाई के लिए कैसे सूचीबद्ध कर दी जाती हैं?

उन्होंने कहा है कि पहलेसे ही इस तरह की कई याचिकाएं कोर्ट में लंबित है। तो गोस्वामी याचिका किस आधार पर आगे बढ़ा दी गई?

उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि जब हज़ारों लोग लंबे समय से जेलों में बंद है और उनकी याचिका पर सुप्रीमकोर्ट ने कई महीनों से सुनवाई नही की तो कैसे और किस आधार पर गोस्वामी की याचिका सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध के दी गई।

क्या इसे लेकर मास्टर ऑफ रोस्टर और मुख्य न्यायाधीश की और से कोई विशेष आदेश या निर्देश दिया गया है?

दवे ने यह भी कहा है कि यहां पर गंभीर मुद्दा ये है कि कोरोना महामारी के पिछले आठ महीनों में रजिस्ट्री चुनिंदा अंदाज में मामलों को सूचीबद्ध करने में लगा हुआ है। लेकिन अर्णब गोस्वामी को प्रेविलेज मिल रहा है। न्यायिक प्रक्रिया में पक्षपात पूर्ण रवय्या है।

इस पत्र का पलटवार करते हुए गोस्वामी की पत्नी ने कहा दवे उन्हें निशाना बना रहे है। आगे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट महासचिव को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, ‘मैं दवे का पत्र पढ़कर अचंभित और डरी हुई हूं. न तो मैं दवे को जानती हूं और न ही उनसे कभी मिली हूं. हालांकि दवे द्वारा मेरे पति की याचिका को निशाना बनाने का मेरे द्वारा विरोध किया जाएगा,

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here