विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन का मंगलवार को भी कोई समाधान नही निकला। 35 किसान संघठनों के नेताओ और सरकार के बीच सव्वा तीन घंटे की बातचीत चली जो बेनतीजा रही। इसके बाद किसानों ने आंदोलन को और तेज कर दिया है।
सरकार से वार्ता के बाद निकले किसान संगठनों ने कहा कि हमारा आंदोलन जारी रहेगा। सरकार ने हमें एक विशेष कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया। लेकिन यह हमें मंज़ूर नही। क़ानून रद्द करने के बाद ही हम आंदोलन ख़त्म करेंगे।
मंगलवार को हुई इस बैठक में किसानों के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री ओम प्रकाश मौजूद थे।किसानों से बातचीत के बाद नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा बातचीत काफ़ी अछी हुई है अब हम 3 दिसंबर को फिर बातचीत करेंगे।
लेकिन इस बैठक में स्वराज इंडिया के योगेन्द्र यादव को दूर रखा गया। गृहमंत्री अमित शाह ने योगेन्द्र यादव को बैठक में शामिल होने से माना कर दिया था। जिस पर योगेन्द्र यादव ने सवाल उठाया कि गृहमंत्री को मुझसे किस बात का डर लगता है? सरकार किसी तरह यह आंदोलन रोकना चाहती है, ऐसा भी उन्होंने कहा।
सरकार ने चर्चा चलने तक क़ानून का क्रियान्वयन रोक देना चाहिए। और इस पर सरकार गम्भीर है इस का प्रमाण दे। सरकार कहती है की क़ानून अच्छे है लेकिन इसमें किसान विरोधी बातें है। हमारी माँग है की क़ानून रद्द किया जाय, ऐसा भी योगेन्द्र यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा।
बता दे कि विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन का आज सातवा दिन है। लेकिन अभी तक किसानों की समस्या का काई हल नही निकालने के कारण किसानोंने आंदोलन तेज कर दिया है।








