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खबर केरल के तिरुवनंतपुरम से निकल कर आई है । मिली जानकारी के मुताबिक श्री सरकारा देवी मंदिर के परिसर में आरएसएस के सदस्य सामूहिक अभियान और अथियार चलाने का प्रशिक्षण ले रहे थे। जिसकी शिकायत मंदिर के दो श्रद्धालुओं समेत आस पास के निवासियों ने की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए बीते बीस जून को केरल उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्यों को नोटिस जारी किया हैं।
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देश की भोली भाली जनता मंदिरों में विशेष आस्था रखते हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ जैसी संगठन इन मंदिरों का इस्तेमाल समाज का माहौल बिगाड़ने वाली घटनाओं को अंजाम देने के लिए करता हैं।
आरएसएस के सदस्यों से तंग आकर केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित सरकारा देवी मंदिर के दो श्रद्धालुओं और आस पास के निवासियों ने इनके खिलाफ याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि आरएसएस के सदस्य कथित तौर पर संबंधित अधिकारियों से बिना किसी प्राधिकरण के मंदिर में अवैध गतिविधियों का संचालन करते हैं। इनमें मंदिर परिसर के भीतर तंबाकू उत्पादों का उपयोग भी शामिल है।
उन्होंने आगे कहा कि आरएसएस के सदस्य सामूहिक अभ्यास और हथियार चलाने का प्रशिक्षण लेते हैं। इस बीच वे जोर-जोर से नारे लगाते हैं, जिससे मंदिर का शांतिपूर्ण माहौल बाधित होता है।
इस मामले की सुनवाई करते हुए केरल उच्च न्यायालय ने बीते बीस जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्यों को तिरुवनंतपुरम में श्री सरकारा देवी मंदिर के परिसर में कथित रूप से अतिक्रमण करने के लिए नोटिस जारी किया हैं। जिसकी अगली सुनवाई छब्बीस जून, दो हजार तेईस को होगी।
बताते चले की आरएसएस को विश्व स्तर पर एक आतंकी संगठन के रूप में चिन्हित किया गया है। अमेरिका के एक वेबसाइट ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को एक अतंगवादी संगठन के लिस्ट में डाल रखा हैं।
इस वेबसाइट को ऑब्जर्व, ऑरिएंट, डिसाइड, एक्ट (ओओडीए) नाम का एक संगठन चलाता हैं । वेबसाइट में संघ को बीजेपी की उग्र विचारधारा का जड़ माना गया हैं।








