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आज कल दुश्मन वर्ग का काम भी बाबा साहेब और उनके सबसे बड़े अनुआई मान्यवर कांशीराम साहब का नाम लिए बिना नहीं चलता हैं। लेकिन बहुजन समाज के लोग सिर्फ मूलनिवासी बहुजन महापुरुषों की जय जयकार करने वालो पर भरोसा कर उन्हे मसीहा मान लेते हैं। जबकि मूलनिवासी महापुरुषों के विचारधारा से उनका कोई लेना देना नहीं होता हैं।
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जिन लोगो ने कभी बाबा साहेब को देशद्रोही बता कर नागरिकों को उनके खिलाफ भड़काया था। आज वे लोग भी बाबा साहेब के मूर्तियों पर फूल और माला चढ़ाते नजर आते हैं।
जिसका सबसे बड़ा कारण है बाबा साहेब के सबसे बड़े अनुआई मान्यवर कांशीराम साहब और उनके द्वारा बनाया गया बामसेफ संगठन ।
एक तरफ जहा मनुवादियों ने बाबा साहेब के विचारों को देश के पचासी फीसदी मूलनिवासी बहुजन समाज तक पहुंचने नहीं दिया। वही दूसरी तरफ कांशीराम साहब के क्रांतिकारी सामाजिक आंदोलन और बामसेफ के निरंतर कार्य ने बाबा साहेब के विचारों को बहुजन समाज में फैलाया हैं। और सिर्फ बाबा साहेब ही नही बल्कि राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, छत्रपति शाहू जी महाराज, माता सावित्रीबाई फुले, जन नायक बिरसा मुंडा ऐसे सैकड़ों मूलनिवासी महानायको के विचारो से समाज को जोड़ा हैं।
आज समाज का एक बड़ा हिस्सा बाबा साहेब के संघर्षों को जन चुका हैं और उनके इस सम्मान जनक और गौरवमय जीवन के लिए डॉक्टरों अंबेडकर का योगदान कितना महत्वपूर्ण हैं यह भी लोग जान चुके हैं।
लेकिन आज बाबा साहेब को लोग पूजने लगे हैं। जिसका फायदा दुश्मन वर्ग भी उठाने लगा हैं। आज लोगो ने बाबा साहेब को सिर्फ मूर्तियों और जय जयकार तक सीमित रख दिया हैं। जिससे दुश्मन वर्ग भी इनका नाम लेकर राजनीतिक मलाई चाट लेता हैं।
लेकिन, यह समय है बाबा साहेब के विचारों से जुड़ने का। बाबा साहेब द्वारा दिए गए संदेशों से अपने दोस्त और दुश्मन की पहचान करने का। जो काम बामसेफ जैसी संगठन करा रही हैं।
आज देश के विभिन्न राज्यों में बामसेफ, मूलनिवासी संघ, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ जैसी संगठन मूलनिवासी महापुरुषों की विचारधारा को जन जन तक पहुंचा रही हैं।
बामसेफ , मूलनिवासी संघ और मूलनिवासी विद्यार्थी संघ जैसे संगठनों के कारण लोग बाबा साहेब को सिर्फ मूर्तियों और जय जयकारों तक सीमित नहीं रख रहे हैं। बल्कि उनके उद्देश्यों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं।







