
वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक तथा फूले अंबेडकरी आंदोलन के वरिष्ठ विचारक डॉ भाऊ लोखंडे इनका नागपुर में निधन हुआ। वे 78 वर्ष के थे।
तमाम परिवर्तनवादी आंदोलन में वे प्रखर वक्ता, आंदोलक, वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक के रूप में जाने जाते हैं। उनके कई लेख, भाषण और पुस्तकें चर्चित हैं।
डॉ भाऊ लोखंडे भाऊ लोखंडे राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के पोस्ट ग्रेजुएट पाली प्राकृत विभाग के भूतपूर्व रिडर थे। साथ ही उन्होंने डॉ बाबासाहेब आंबेडकर चेयर के चेयरपर्सन, तथा विश्वविद्यालय के कॉम्पिटेटिव एग्जाम स्टडी सेंटर के प्रमुख भी थे।
उन्होंने “संत साहित्यावर बौद्ध धम्माचा प्रभाव” इस विषय पर अपनी पीएचडी की। उनका यह ग्रंथ विश्वभर में अभ्यासकों और कार्यकर्ताओं में चर्चित है। उन्होंने आंदोलन की आवश्यकताओं को देखकर प्रचुर मात्रा में साहित्य लिखा। उन्होंने सैंकड़ों की संख्या में लेख लिखें। जगह जगह व्याख्यान और भाषण दिए।
वे “निकाय” इस नियतकालिक के संपादक थे। भारत के कई महत्वपूर्ण समाचार पत्रों और नियतकालिकों में सैकड़ों की संख्या में उनके लेख प्रकाशित हुए हैं।
उनका साहित्य हिंदी मराठी अंग्रेजी में उपलब्ध है। उनके लिखित मराठी साहित्य में से –
अयोध्या कुणाची? रामाची? बाबराची? की बुद्धाची?
डॉ. आंबेडकरी हितशत्रुंच्या जाणिवा (पारिजात प्रकाशन, कोल्हापूर – २०१२)
मराठी संत साहित्यावर बौद्ध धर्माचा प्रभाव
महाकवी अश्वघोषरचित बुद्धचरित
एशियातील बौद्धधर्म
डॉ. आंबेडकरी बावीस प्रतिज्ञा
बौद्धांचे सण उत्सव आणि मानसिकता
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांचा विद्यार्थ्यांना उपदेश, मार्गदर्शन व शिक्षण विषयक विचार
वेदकालीन गोमांस भक्षण
थेरगाथा विवेचन
वज्रसूचि का अनुवाद
यह साहित्य अत्यंत चर्चित है।
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर के बाद जो बुद्धिजीवी कार्यकर्ता समाज को नेतृत्व देने के लिए सामने आएं उनमें डॉक्टर भाऊ लोखंडे इनका नाम प्रमुख था। उन्होंने न केवल साहित्य की रचना की बल्कि संगठन संगठनात्मक आंदोलन में भी अपना सहभाग और नेतृत्व दिया। उन्होंने रिपब्लिकन स्टूडेंट फेडरेशन का नेतृत्व किया, उसे बढ़ावा दिया और मार्गदर्शन किया।
उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों तथा विश्व के कई देशों में फुले अंबेडकर आंदोलन और बुद्ध विचारधारा पर व्याख्यान दिए तथा सम्मेलनों में वे सहभागी हुए।
थाईलैंड में इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ़ एंगेज्ड बुध्दिस्ट के कार्यकारी समिति के सदस्य थे। उन्होंने थाईलैंड में जागतिक बुद्धधम्म सम्मेलन में हिस्सा लिया और व्याख्यान दिया। नेपाल में हुए वर्ल्ड फैलोशिप ऑफ़ बुद्धिस्ट कॉन्फ्रेंस में बुद्ध के बारे में अपना निबंध प्रस्तुत किया जो बहुत चर्चित हैं। इसके अलावा जापान में मानवाधिकार पर पढ़ा गया उनका निबंध बहुत ही चर्चित है।
सन 1994 में दीक्षा भूमि नागपुर में हुए बामसेफ के राष्ट्रीय अधिवेशन में वे आमंत्रित वक्त के रूप में शामिल हुए थे। उन दिनों बामसेफ संस्थापक यशकायी डी के खापर्डे साहेब के साथ उनके कई चर्चाएं हुयी।
पीपल्स पार्टी ऑफ़ इंडिया डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष मू बी डी बोरकर जी ने उनकी स्मृति में अभिवादन करते हुए कहा की उनके जाने से आंदोलन का वैचारिक आधारस्तभ हमने खोया है।
उनकी स्मृति में https://www.facebook.com/mntnewsnetwork परिवार की ओर से विनम्र अभिवादन।
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