
देश का किसान फिर एक बार सड़कों पर है। इस बार केंद्र की मोदी सरकार किसानों के निशाने पर है । दरसल मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े ३ अध्यादेश पास किए है। इतना ही नहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सोमवार को तीनों अध्यादेश बिल के रूप में संसद में पेश किए। यह बिल किसानों के हक्क एवं अधिकारों का हनन करते हैं। जिस की वजह से देश के किसानों में मोदी सरकार के प्रति रोष पैदा हुआ है।
मोदी सरकार के अत्याचारी क़ानूनों के ख़िलाफ़ अब किसानों ने आवाज़ बुलंद की है। १७ सितम्बर को किसान अब संसद भवन का घेराव करने वाले हैं।
कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल, आवश्यक वस्तु (संशोधन) बिल, मूल्य आश्वासन तथा कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता बिल यह वो तीन बिल हैं। इन बिलों का विरोध अध्यादेश पास होने के समय से ही किया जा रहा है। इनके विरोध में हरियाणा के पीपली गाँव में किसानों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय हरियाणा सरकार के तरफ़ से किसानों पर लाठीचार्ज भी किया गया।
राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रधान जसबीर सिंह भाटी और किसान नेता प्रह्लाद सिंह ने इस घटना पर अपना रोष भी प्रकट किया था। जिस प्रकार से सरकार ने पीपली रैली में किसानों पर लाठियां बरसाईं वो निंदनीय है, ऐसा उन्होंने कहा था।
वहीं किसान संगठन लगातार किसानों पर थोपे गए अध्यादेशों का विरोध कर रहे हैं और इसके लिए आंदोलनरत हैं. उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए भी कानून बनाया जाए.
इसी बीच मोदी सरकार की खाद्य प्रसंस्करण मंत्री और शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया है।
उन्होंने कृषि बिलों के विरोध में गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ को इस्तीफ़ा सौंपा था। जिसे महामहिम राष्ट्रपति ने मंज़ूर कर लिया है।
एनडीए में शामिल अकाली दल ऐसे तीन बिलों में से पहले बिल का विरोध किया था, जिसे लोकसभा में पारित कर दिया गया है।








