उत्तर प्रदेश के हाथरस में मूलनिवासी समाज की बेटी पर हुए अत्याचार तथा हत्या का रविवार को जापान में कड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया। जापान के संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय के सामने बड़ी तादाद में जापानी और भारतीय मूल के लोग इकट्ठा हुए थे। इन में जापानी बौद्ध भिक्षु भी शामिल हुए थे। भारत में जातिवाद प्रेरित बढ़ती घटनाओं पर आंदोलनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र संघ का ध्यानकर्शन किया।
जापान में हुआ यह आंदोलन अत्यंत शांततापूर्ण तरीक़े से सम्पन्न हुआ। आंदोलनकारी अपने हाथों में बैनर और प्लेकार्ड ले कर इसमें शामिल हुए थे। पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी अपने बच्चों के साथ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
प्रदर्शनकारियों ने बैनर पर महत्वपूर्ण संदेश लिखे थे। हम शांति से न्याय की माँग करते हैं। समानता किसी को दुःख नहीं पहुँचाता। लड़कियों को मानवाधिकार मिलना ज़रूरी है। जातिवाद प्रेरित अत्याचार बंद करो। इत्यादि संदेश लिखे प्लेकार्ड आंदोलन में दिखाए जा रहे थे
हाथरस की घटना को एक महीने से भी ज़्यादा समय हो रहा है। भारत की मीडिया इस घटना और अपराधियो को पनाह दे रहे है। राजनैतिक दल भारत के इस प्रकार के जातीवादी अत्याचार को उजागर नही होने दे रहे इस विरोध प्रदर्शन में लोग सडको पर उतरे थे।
जापान के साथ लंदन और अमरीका में भी हाथरस की घटना के विरोध में प्रदर्शन हुए है। इस विरोध प्रदर्शन में लोग सडको पर उतरे थे। भारत सरकार जातिवाद प्रेरित अत्याचारों पर शिकंजा नहीं कसती तो लोगों के रोष का सामना करना पडेगा।
बता दे कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक 19 वर्षीय मूलनिवासी बेटी का बलात्कार और हत्या कर गयी थी। यह घटना इतनी क्रूर थी की उस असहाय लड़की की आरोपियों ने ज़ुबान काटी और रीढ़ की हड्डी तक तोड़ दी। जिसके बाद दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। लेकिन पुलिस प्रशासन और अधिकारियों ने मिल कर कथित तौर पर पीड़िता के परिजनों को संज्ञान में न लेते हुए आधि रात को अंतिम संस्कार कर दिया था। जिससे मूलनिवासी समाज में रोष व्याप्त है। आकड़ों के अनुसार भारत में हर घंटे 39 महिलाओं का बलात्कार होता है। जो ज़्यादातर जातिवाद से प्रेरित होते है।









