देश की दुर्दशा; भूक की गम्भीर श्रेणी में पहुँचा भारत !

हाल ही में वैश्विक भूख सूचकांक, ग्लोबल हंगर इंडेक्स अर्थात GHI ने आँकड़े जारी किए हैं।जिस में 107 देशों की सूची में भारत 94वें स्थान पर है| यह अब तक की भूख की ‘गंभीर’ श्रेणी है। विशेषज्ञों ने इसके लिए खराब कार्यान्वयन प्रक्रिया, प्रभावी निगरानी की कमी, कुपोषण से निपटने का उदासीन दृष्टिकोण और बड़े राज्यों के खराब प्रदर्शन को दोषी ठहराया है।

रिपोर्ट के अनुसार, हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश 75वें, म्यांमार 78वें और पाकिस्तान 88वें स्थान पर हैं। वहीं, नेपाल 73वें और श्रीलंका 64वें स्थान पर हैं। दोनों देश ‘मध्यम’ श्रेणी में आते हैं। लेकिन भारत की स्थिति इनसे गम्भीर हो चली है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 14 फीसदी आबादी कुपोषण की शिकार है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों का मृत्यु दर 3.7 प्रतिशत था। इसके अलावा कुपोषण से मरने वाले बच्चों का दर 37.4 प्रतिशत था।

आइए जानते है क्या है कुपोषण

कुपोषण (Malnutrition) वह अवस्था है जिसमें पौष्टिक पदार्थ और भोजन, अव्यवस्थित रूप से लेने के कारण शरीर को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है और जिसके कारण गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है।

कुपोषण तब भी होता है जब किसी व्यक्ति के आहार में पोषक तत्त्वों की सही मात्रा नहीं होती है।

दरअसल, हम स्वस्थ रहने के लिये भोजन के ज़रिये ऊर्जा और पोषक तत्त्व प्राप्त करते हैं, लेकिन यदि भोजन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिजों सहित पर्याप्त पोषक तत्त्व नहीं मिलते हैं तो हम कुपोषण के शिकार हो सकते हैं।

जीएचआई की सूची में भारत का खराब प्रदर्शन लगातार जारी है। पिछले कुछ सालों पर नज़र डाले तो पता चलता है कि 2019 में 117 देशों की सूची में भारत का 102 स्थान पर था।साल 2018 के इंडेक्स में भारत 119 देशों की सूची में 103वें स्थान पर था। वहीं, 2017 में इस सूचकांक में भारत का स्थान 100वां था। याने पिछले 4 साल से देश में भुखमरी गम्भीर रूप धारण कर चुकी है।

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