2 अप्रैल से भी ज्यादा महत्वपूर्ण बन गई है 10 अप्रैल।

साथियों 2 अप्रैल के आंदोलन की बहुजन समाज के साथी बहुत तारीफ करते है, वास्तव में 2 अप्रैल 2018 का भारत बंद ऐतिहासिक भी था और तारिफ करने लायक भी था, तारीफ करने लायक इसलिए था कि हम बड़े पैमाने पर इकट्ठा हो सकते है, 2 अप्रैल को अनेक साथियों की शहादत भी हुई लेकिन इन शहादतों से जो हासिल होना चाहिए था वह आज तक भी हासिल नहीं हुआ, ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों पर दिन प्रतिदिन अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं और sc-st एक्ट पंगु सा बनकर रह गया है, उसके बाद अत्याचारों में कमी आई हो ऐसा नहीं है बल्कि अत्याचार की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और इन अत्याचार की घटनाओं को अंजाम देने वाले लोगों को सजा भी नहीं हो पा रही है, यह चिंताजनक पहलु भी है, क्या इसलिए नहीं हो पा रही क्योंकि संविधान का पालन करने वाले लोग शासन- प्रशासन में तथा न्यायपालिका में ,विधायिका में और कार्यपालिका में नहीं है, बल्कि मानसिक तौर पर इन घटनाओं का समर्थन करने वाले लोग भी बड़ी संख्या में है। जब तक मानसिक तौर पर बड़ा बदलाव जनता में नहीं होता, तब तक इन अत्याचारों से मुक्ति असंभव है और सरकार मानसिकता में बदलाव के लिए कोई काम नहीं कर रही बल्कि संविधान के विपरीत मानसिकता तैयार करने में सरकार जुटी हुई है ।

साथियों में एक मोटा सा सवाल आपसे करना चाहता हूं एससी एसटी एक्ट के लिए जिस तन्मयता से आप लोग संघर्ष करने आए थे ,वह संघर्ष आज क्यों नहीं कर रहे आप ? एससी एसटी एक्ट तो संविधान की अनुपालना में मात्र एक एक्ट है और वर्तमान में केंद्र सरकार जिस प्रकार से संविधान विरोधी फैसले ले रही है उन फैसलों से आने वाले समय में देश में जो परिस्थितियां निर्माण होंगी,उनके लिए एससी एसटी एक्ट बेहद पंगु और कमजोर साबित होगा, जिसके प्रति शायद हम लोग गंभीर नहीं हैं।

एससी एसटी एक्ट से ज्यादा महत्व तो हमें भारत के संविधान को देना चाहिए था,लेकिन आज आपके सामने लैटरल एंट्री के माध्यम से आईएस जैसे पदों की गरिमा खत्म कर दी गई है, सरकार केवल यहीं नहीं रुकी है अनेक विभागों में लैटरल एंट्री के माध्यम से भर्तियां जाए अब तो प्रोफेसर स्तर पर भी लैटरल एंट्री सरकार ने शुरू कर दी है, ऐसी स्थिति में आप का प्रतिनिधित्व जहां दम तोड़ देगा, वही संविधान का बड़े पैमाने पर उल्लंघन भी होगा लेकिन इसके लिए आप अपने घरों से क्यों नहीं निकले ? जब संविधान ही निष्क्रिय हो जाएगा तो फिर सोच ही आपके लिए क्या बचेगा ? आप कब तक इंतजार करते रहेंगे ? यहां अब 2 अप्रैल पर भी संदेह पैदा होने लगा है क्योंकि 2 अप्रैल को इतना बड़ा आंदोलन करने वाले यदि सचमुच में जागरूक होते तो आज बड़े पैमाने पर आंदोलन कर रहे होते ? लेकिन आज आंदोलन के नाम पर कोई हलचल ही नहीं है, यह हमारे जीते जी मरने के समान है क्योंकि मरने वाला व्यक्ति कोई हलचल नहीं करता।

लोग संविधान बचाने की बात कर रहे है, मुझे लगता है कि हमें संविधान बचाने की अपेक्षा संविधान को लागू करने की बात पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए ,लागू करवाने की बात पर ज्यादा काम करना चाहिए। आपका विरोध ही इस बात को अच्छी तरह से जानता है वह कभी भी सविधान को बदलने का काम नहीं करेगा क्योंकि संविधान को बदलने से एक बहुत बड़ी जवाला देश में पैदा हो सकती है ,इसलिए वह संविधान को निष्क्रिय करने का काम करेगा ,जैसे कि लैटरल एंट्री के माध्यम से असवैधानिक भर्तियां और ओबीसी के साथ असवैधानिक क्रीमीलेयर लगाकर आपको अधिकार वंचित किया जा रहा है, लेकिन आपका इस तरफ ध्यान ही नहीं है।

भारतीय संविधान सम्मान सुरक्षा संवर्धन राष्ट्रव्यापी महा जन जागरण अभियान ने विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर,विभिन्न संगठनों के साथ बातचीत करके, 10 अप्रैल को पीपल सोशल एक्शन करने का कार्यक्रम बनाया है । इस कार्यक्रम में सभी संगठनों के साथी शामिल हो सकते है तथा शामिल होना चाहिए। इस कार्यक्रम को” संविधान चेतना कार्यान्वयन रैली ,तथा मूलनिवासी बहुजनों का एकता अभियान” नाम दिया गया है।

आप प्रत्येक जिले में एक साथ इकट्ठा होकर के इस रैली का आयोजन कीजिए । इस रैली के माध्यम से सरकार को चेतावनी का काम कीजिए तथा अपने लोगों में चेतना पैदा कीजिए और आपसी सहयोग एवं समन्वय बनाकर ,अपनी एकता कायम कीजिए और इस एकता को लगातार आगे बढ़ाते रहिए। इसी एकता से आप का कल्याण होगा।

इस रैली के लिए आठ महत्वपूर्ण मुद्दे रखे गए है ,इसके अतिरिक्त आपको अन्य मुद्दे भी महत्वपूर्ण लगे तो आप उनकी चर्चा इन रैलियों में कर सकते हैं ।

-10 अप्रैल 2022 के महत्वपूर्ण मुद्दे जो इन जिलास्तरीय रैलियों में चर्चा किए जाएंगे।

-असवैधानिक क्रीमीलेयर के विरोध में लैटरल इंट्री के विरोध में

-जातिआधारित जनगणना की मांग को लेकर एवं जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर

-राष्ट्रीयकरण का पैगाम-निजीकरण पर लगाम

-शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा में नाकाम केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के खिलाफ ठीकरा फोड़ो अभियान

-मूलनिवासी पहचान-साम्प्रदायिकता की काट

-मूलनिवासी बहुजन समाज के संगठनों का सहयोग, समन्वय एवं आपसी एकता का अभियान

-ईवीएम की अपेक्षा देश में बैलट पेपर से चुनाव हो।

-देश का संविधान पूर्ण रूप से लागू किया जाए

अब एक सवाल खड़ा हो रहा है कि भारत का संविधान आज तक पूर्ण रुप से लागू क्यों नहीं किया ? संविधान के अनुरूप इस देश में नीतियां निर्माण क्यों नहीं की जा रही ? संविधान के अनुसार इस देश का सम्पूर्ण ढांचा क्यों नहीं चलाया जा रहा ? आखिर जनता कब मजबूर करेगी सरकारों को संविधान के अनुरूप चलने के लिए ? संविधान के नाम पर धोखा करने वाले नेताओं को ,सत्ता पक्ष में रहने वाले धोखेबाज षड्यंत्रकारी नेताओं को आखिर जनता कब सजा देगी ? भारत का संविधान इस देश के नागरिकों को शिक्षा ,स्वास्थ्य रोजगार और सुरक्षा की गारंटी देता है लेकिन इस देश की सरकारों में स्थापित लोगों ने आज तक इस संविधान के कमिटमेंट के साथ क्यों खिलवाड़ किया ? संविधान के साथ न्याय क्यों नहीं किया ? देश की जनता के साथ अन्याय क्यों नहीं किया ? क्या यह मुद्दे 2 अप्रैल से ज्यादा गंभीर नहीं है ? क्या इन मुद्दों के लिए हम मिलकर नहीं लड़ेंगे ? यदि हम इन मुद्दों के लिए हम मिलकर नहीं लड़ेंगे तो मैं कहूंगा कि 2 अप्रैल का आंदोलन कोई आंदोलन नहीं था,बल्कि वह दुश्मन द्वारा प्रायोजित कोई षड्यंत्र था । उस षड़यंत्र की चाल में हम लोग आकर के ही आंदोलनरत थे क्योंकि सचमुच में यदि हम जागरूक हैं तो आज एक बड़े आंदोलन की जरूरत है अगर यह आंदोलन करने में हम आज सक्षम नहीं है तो फिर 2 अप्रैल का भी ढ़ोंग ही था ।

मैं उम्मीद करता हूं कि 10 अप्रैल को सभी जिलों में सभी साथी मिलकर के इन रैलियों को सफल बनाएंगे तथा शांतिपूर्ण तरीके से यह कार्यक्रम आयोजित करेंगे। हमसे इस कार्यक्रम के लिए हाथ जोड़कर भी अपील करता हूं कि 10 अप्रैल को सभी संगठन सभी साथी देश हित में जनता के हित में संविधान के हित में यह कदम जरूर बनाएंगे।

इन्हीं आशा और उम्मीदों के साथ,

सभी संगठनों का सांझा कार्यक्रम।
एक साथ पूरे देश में,
आइए आप भी हिस्सा बने।
हम भी हिस्सा बने।
जय भीम जय मूलनिवासी जय संविधान।

आपका साथी,

सुरेश द्रविड़
9812259574

1 COMMENT

  1. महापुरुषों के आन्दोलन को हमें बामसेफ के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए सभी मूलनिवासियों तक ले जाना चाहिए। व्यवस्था परिवर्तन तभी सम्भव है।जय भीम जय मूलनिवासी जय संविधान जय भारत

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