- बाबासाहेब के अनुसार “भारत का संविधान देश को समर्पित एक विलक्षण दस्तावेज है।”
- भारत का संविधान महज वकीलों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि यह जींवन रूपी गाड़ी का पहिया है।
- संविधान कार्य करने योग्य है, लचीला और कठोर भी है।
- बाबासाहेब संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष थे और उन्होंने 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां युक्त संविधान 2 साल 11 माह 17 दिन में अपनी स्वास्थ्य की परवाह न् करते हुए लिखा था।
- संविधान के प्रथम अनुच्छेद में ही देश का संवैधानिक नाम भारत रखा गया है।
- बाबासाहेब के अनुसार “संविधान में उपबन्धित मूल अधिकार संविधान का भूषण है।”
- बाबासाहेब के अनुसार “यदि संविधान विफल होता है तो इसका मतलब यह नहीं कि हमारे पास एक खराब संविधान है; बल्कि इसका अर्थ यह है कि संविधान को चलाने वाला व्यक्ति ही दुष्ट है।”
- यह दुनियां का सर्वश्रेठ लिखित मानववादी ग्रन्थ है।
- भारत का संविधान एक राष्ट्रग्रन्थ है जो सभी भारतीयों के लिए अनुकरणीय है।
- भारत का संविधान किसी वर्ग विशेष के हितों का संरक्षण न् कर सभी भारतीयों के कल्याण की उदात्त भावना से लिखी गई है।
- हमारा संविधान स्वतंत्रता, समानता, बंधुता और न्याय के चार स्तम्भों पर अवस्थित है।
- हमारा संविधान हमें राष्ट्रधर्म और भारतीय राष्ट्रवाद की शिक्षा देता है और धर्म आधारित राष्ट्र को अस्वीकार करता है।
- भारत का संविधान किसी अतिप्रकृतिक शक्ति की महत्ता को नहीं, बल्कि हम भारत के लोग का महत्व देता है।
- भारत का संविधान “ईश्वर की शक्ति” के विकल्प के रूप में “दृढ़ प्रतिज्ञान की शक्ति” का विकल्प दिया है।
- भारत का संविधान वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानववाद के प्रचार की बात करता है तथा संवैधानिक नैतिकता और बंधुत्व भावना की अवधारणा से परिपूरित है। इस प्रकार यह विधिशास्त्र के साथ नीतिशास्त्र भी है।
- भारत का संविधान उपेक्षितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों तथा सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों का विशेष उपबन्ध करता है ताकि समाज मे समता आए और राष्ट्र की तरक्की हो।
- हमें संवैधानिक जागरूकता के लिए संविधान पाठ, संविधान सप्ताह, संविधान पखवाड़ा, संविधान रैली, संविधान वाचन (चैंटिंग) की परंपरा की शुरुआत करनी चाहिए।
- प्रत्येक संस्कार में “संविधान प्रस्तावना” का पाठ होना चाहिए।
- संविधान में “मूल अधिकार” के साथ “मूल कर्तब्य” का प्रावधान है जिसका प्रत्येक भारतीयों को पालन करना चाहिए।
- हमे हर हाल में संविधान की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
- संविधान के अनुसार देश में समाज व्यवस्था की स्थापना सरकार का असली राजधर्म है।
- संविधानवाद ही असली राष्ट्रवाद है।
जय भारत! जय संविधान !!








