संविधान दिवस 26 नवंबर 2021 को सादर समर्पित
ब्राम्हण धर्म में चार वर्ण। चारों वर्णों में ब्राम्हण महान फिर क्षत्रिय और वैश्य। इसलिए भारतीय राजनीति में भी द्विजातियां ही महान हैं ।शासन प्रशासन में भी उन्हीं का वर्चस्व। वेद आर्यों का पवित्र ग्रंथ। ईश्वर कृत। इसलिए बाहमण धर्म भी ईश्वर कृत। वर्ण और जातियां भी ईश्वर कृत। क्योंकि वर्ण धर्म की उत्पत्ति ऋग्वेद से हुई है। धर्म की राजनीति का मतलब धर्म में जो सबसे ऊंचा है राजनीति में उसी की चलती है।
भाजपा सरकार के कृषि कानून बिल के विरोध में किसान आंदोलन लगभग साल भर चला। सात सौ से अधिक किसान आंदोलन स्थल पर ही शहीद हो गए। भाजपा सरकार के एक मंत्री के पुत्र ने लखीमपुर खीरी के आंदोलित किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ा कर आठ किसानों को मौत के घाट उतार दिया। संविधान के दायरे में रहकर आंदोलन कर रहे किसानों को रोकने के लिए भाजपा सरकार ने सड़कों पर लोहे की कीलें तक ठोकवां दी। किंतु किसान अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहें। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश उत्तराखंड और पंजाब के विधानसभा के होने वाले चुनाव को मद्देनजर रखते हुए एक गहरी चाल चली।
तीनों राज्यों की सत्ता कहीं मूलनिवासियों के हाथ में न चली जाए इस भय से उन्होंने ने धर्म की राजनीति से प्रेरित एक बयान दिया वह भी गुरु नानक देव जी के जन्मदिन प्रकाश पर्व के शुभ अवसर पर। केंद्र और राज्य की सत्ता पर हमेशा सवर्णों का एकाधिकार बना रहे इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्म का सहारा लेते हुए यह बयान दिया कि भाइयों और बहनों! आज मैं देशवासियों से क्षमा मांगते हुए सच्चे मन से और पवित्र हृदय से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्या में कोई कमी रही होगी जिसके कारण दीए के प्रकाश जैसा सत्य हम किसान भाइयों को समझा नहीं पाए। आज गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व है यह समय किसी को भी दोष देने का नहीं है। आज मैं आपको पूरे देश को बताने आया हूं कि आज हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस करने का निर्णय ले लिया है।
हमें इस बात को कभी नहीं भूलना चाहिए कि नरेंद्र मोदी का चरित्र छलिया विष्णु का चरित्र है जिसने अमृत बंटवारे में राक्षसों के साथ विश्वासघात किया था। यही नरेंद्र मोदी 2014 में सत्ता में आने से पहले अपने को नीच जाति का घोषित किया। गरीबों के खातों में पंद्रह पंद्रह लाख रुपए डालने का वादा किया था। इसी प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था और इसी प्रधानमंत्री ने सबका साथ सबका विकास करने का भी वादा किया था। किंतु इसी प्रधानमंत्री के विधायकों और सांसदों ने बेटी बचाओ की जगह देश की बेटियों की आबरू लूटा और इसी प्रधानमंत्री ने मूलनिवासी बहुजनो के संवैधानिक अधिकारों को छीनने में अग्रणी भूमिका निभाया। इसी प्रधानमंत्री ने सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया किंतु मूलनिवासी बहुजनो के बैकलाग को पूरा नहीं किया।
देश को आजाद होने के बाद ही आर्य पुत्रों ने धर्म की राजनीति का शुभारंभ कर दिया था। उन्होंने धर्म की राजनीति से सत्ता प्राप्त करने का संकल्प लिया और 26 नवंबर 1949 को बाबा साहब डॉ अंबेडकर ने देश को संविधान सौंपा। 23 दिसंबर 1949 को अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने बड़ी छदम नीति से बाबरी मस्जिद में रामलला की मूर्ति रखवा कर धर्म की राजनीति की शुरुआत कर लोकतंत्र के मंदिर संसद पर द्विजातियों का कब्जा करा दिया।
गांधी जी की छद्म नीति से ही नेहरू अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री और पंडित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश की अंतरिम सरकार में मुख्यमंत्री बने। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने प्रथम लोकसभा चुनाव में ब्राह्मणों को सबसे अधिक टिकट देकर संसद और मंत्रिमंडल पर कब्जा कर लिया तथा देश के सारे प्रांतों के मुख्यमंत्री ब्राह्मणों को ही चुना। इंदिरा गांधी जब देश की प्रधानमंत्री बनी तो उन्होंने धर्म की राजनीति के लिए ही सन् 1970 में रामचरितमानस की चतुर शताब्दी समारोह किया।
इससे पूर्व डॉ राम मनोहर लोहिया ने बयान दिया कि धर्म दीर्घकालिक राजनीति है। उन्होंने सवर्णों की राजनीतिक सत्ता पर वर्चस्व बनाए रखने के लिए ही जगह जगह रामायण मेला लगवाया। 31 अक्टूबर 1984 को दो सिख धर्म से ताल्लुक रखने वाले सुरक्षा गार्डों ने इंदिरा जी की हत्या कर दी। आर्य पुत्रों ने हिंदुत्व के नशे में चार हजार सिखों को जिंदा जला दिया। कांग्रेस ने सिखों के प्रतिशोध की भावना को ठंडा करने के लिए देश को सरदार मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया। धर्म की राजनीति से कांग्रेस ने सरदारों को सरदार प्रधानमंत्री देकर ठंडा कर दिया।
कांग्रेस में जब आंतरिक कलह के कारण टूट फूट हुई तो जनता पार्टी बनी और जनता पार्टी में जब मंडल कमीशन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ तो जनता दल का प्रादुर्भाव हुआ। जनता दल में अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों ने जब मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने की बात उठाई तो बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा और वी पी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने। मंडल की बात उठते ही भाजपा ने अपना समर्थन वापस लेकर कमंडल की धर्म की राजनीति तेज कर दी। फलतः अटल बिहारी वाजपेई को देश का प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला।
पंडित जवाहरलाल नेहरु की शुरू की गई धर्म की राजनीति कमंडल के माध्यम से भाजपा के पाले में चली गई। तत्पश्चात वह पुनः नरेंद्र मोदी से जुड़ गयी। नेहरू मंत्रिमंडल से लेकर नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल तक राजनीतिक सत्ता पर लगभग सवर्ण जातियों का ही प्रतिनिधित्व है। फिर भी वह धर्म की राजनीति को और मजबूत करने के लिए हिंदू राष्ट्र का राग अलापते रहते हैं। मूलनिवासी बहुजन समाज के नेता भी धर्म की राजनीति से लोकतंत्र के भव्य मंदिर में सवर्ण जातियों को ही प्रस्थापित करना चाहते हैं फिर वे कैसे अपने मूलनिवासी समाज का भला कर पाएंगे? चिंता और चिंतन का विषय है।
दयाराम
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,
पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक)








