देश में 78 प्रतिशत स्कूलों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं..रिपोर्ट

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। “यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस” यह केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट है। अभी की ताजा रिपोर्ट में 2019-2020 के आंकड़े हैं, लेकिन बहुत ही गंभीरता से सोचने वाले आंकड़े हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012-2013 में देश के 22.2 स्कूलों में कंप्यूटर अरु 6.2 स्कूलों में इंटरनेट था। जब 2019-2020 की रिपोर्ट बनी तब, अर्थात 7 वर्षों में कंप्यूटर की सुविधा वाले स्कूलों की संख्या 38.5 प्रतिशत हुयी अर्थात 16.3 प्रतिशत ही बढ़ौतरी हुयी। वहीं 2019-20 में इंटरनेट के सुविधा वाले स्कूल 22.3 प्रतिशत हुए। अर्थात 7 वर्षों में 16.2 की रफ़्तार से बढ़त हुयी। इसका दूसरे शब्दों में विश्लेषण किया जाए तो 2019-2020 के आंकड़ों के अनुसार देश के 61.5 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर नहीं है और 77.7 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट नहीं है।

इस रिपोर्ट के अनुसार 69.4 प्रतिशत स्कूलों में “पुस्तकों के साथ पुस्तकालय” कक्ष है।

आपको बता दें इस रिपोर्ट के अनुसार कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 को मिलकर सरकार के अपने कूल 10,32,570 स्कूल है और इनमें कुल 48,38,868 शिक्षक पढ़ा रहे हैं। दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूल्स जिन्हे केवल मान्यता है लेकिन सरकार की तरफ से फंड नहीं दिया जाता ऐसे 3,37,499 स्कूल है जिनमें 36,02,625 शिक्षक पढ़ा रहे हैं। मतलब सरकार के स्कूल ज्यादा है लकिन उस तूलना में शिक्षक कम है तो प्राइवेट स्कूलों में इसका प्रमाण ज्यादा है।

आपको बता दें कि सरकार के स्कूलों में हमें अभी तक केन्दीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल ही मालूम है। लेकिन इसके आलावा केंद्र और राज्य के शिक्षा विभाग, जनजाति कल्याण विभाग, लोकल बॉडी, सामाजिक न्याय विभाग, श्रम मंत्रालय, रेलवे, सेन्ट्रल तिब्बतीय स्कूल आदि विभागों के माध्यम से स्कूल चलाये जाते हैं। ऊपर के जो आंकड़े दिखाई दे रहे हैं उन्हें आप समझ सकते हैं कि किन स्कूलों में कंप्यूटर की और इंटरनेट की सुविधा है और किन स्कूलों में नहीं है।

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