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संविधान दिवस पर एक अनोखा पहल।
मूलनिवासियो ने जोर सोर से किया संविधान का प्रचार-प्रसार
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संविधान दिवस के उपलक्ष्य में देश के दो सौ से अधिक जिलों में चला बीएस फ़ॉर का कार्यक्रम। इस बीच हर घर संविधान अभियान चलाया गया। संविधान दिवस पर समाज के बुद्धिजीवियों द्वारा सैकड़ो लोगो को संविधान और उसमें दिए गए हक-अधिकरो के बारे में बताया गया।
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26 नवंबर, 2022 दिन शनिवार को संविधान दिवस के उपलक्ष्य पर देश के दो सौ से अधिक जिलों में बीएस फ़ॉर यानी भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा एवं संवर्धन के तहत संविधान बताओ कार्यक्रम चलाया गया। इन कार्यक्रमो का आयोजन विभिन्न राष्ट्रीय स्तरीय संगठनों जैसे बामसेफ, मूलनिवासी संघ, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ जैसे संगठनों इसके अलावा पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया ( डेमोक्रेटिक) द्वारा पूरे भारत मे आयोजन किया गया।
कार्यक्रमो में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब , बिहार, मध्य प्रदेश आदि राज्यो के अनेकों जिलों में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया । इसके अलावा झारखंड के करीब सौलह जिलों में भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा एवं संवर्धन के तहत संविधान बताओ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। जिनमे धनबाद, बोकारो, पलामू, पूर्वी सिंहभूम, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा आदि जिले शामिल हैं।
26 नवंबर का दिन पूरे भारतवासियों के लिए गौरव का दिन हैं। खास कर हजारों वर्षों से शोषित मूलनिवासी बहुजनो के लिए। क्योंकि इसी दिन वर्ष 1949 को उस संविधान को संविधान सभा के द्वारा अपनाया गया था जो सैकड़ो मूलनिवासियों के लिए सामाजिक, आर्थिक, राजनीति और शैक्षणिक उत्थान का जरिया बना।
जब भारतीय संविधान की बात आती हैं तो हम बोधिसत्व डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर को कैसे भूल सकते हैं? संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में बाबा साहेब ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। सात सदस्यों वाली इस ड्राफ्टिंग कमेटी का काम संविधान का लिखित प्रारूप प्रस्तुत करना था। सात सदस्यों में अधिकतर लोग अपने काम से बाहर रहे। जिसके बाद संविधान को लिखने का भार डॉ. आंबेडकर के ऊपर ही आ पड़ा और तबियत खराब रहने के बाद भी उन्होंने संविधान का मसौदा तैयार किया । इस पर कमेटी के एक सदस्य टी. टी. कृष्णमाचारी ने डॉ आंबेडकर की तारीफ करते हुए संविधान सभा मे कहा था कि, ‘मुझे इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि हम सब को उनका (डॉ० आंबेडकर का) आभारी होना चाहिए कि उन्होंने इस जिम्मेदारी को इतने सराहनीय ढंग से अंजाम दिया है।’
दो वर्ष ग्यारह महीने अठारह दिन की मेहनत के बाद संविधान को पूरा किया गया और 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा इसे अपनाया गया था। और अंततः 26 जनवरी , 1950 में पूरे भारत मे इसे लागू कर दिया गया और भारत को एक गणराज्य घोषित किया गया।
बाबा साहेब ने इस देश को विश्व का सबसे बेहतरीन लिखित संविधान दिया हैं। उन्होंने भारत को एक ऐसा संविधान बनाकर दिया जो जाति, लिंग, भाषा, क्षेत्र और धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता। बल्कि हर किसी को समानता, स्वतंत्रता और बंधुता का पाठ पढ़ाता है। और सामाजिक न्याय की गरंटी देता हैं।
आपको बाबा साहेब के उस भाषन के बारे में जानना चाहिए जो उन्होंने 26 नवंबर, 1949 में संविधान सभा मे दिया था। उन्होंने कहा था कि, ”मैं यहां पर संविधान की अच्छाइयां गिनाने नहीं जाऊंगा क्योंकि मुझे लगता है कि संविधान कितना भी अच्छा क्यों ना हो वो अंतत बुरा साबित होगा यदि उसे चलाने वाले लोग बुरे हैं। और संविधान कितना भी बुरा क्यों ना हो वो अंतत अच्छा साबित होगा अगर उसे चलाने वाले लोग अच्छे हैं।”








