नागपुर में होगा बामसेफ़ का 38 वा राष्ट्रीय अधिवेशन; देश के बिगड़ते हालातों पर होगा गहन चिंतन

मूलनिवासी बहुजन समाज की आवाज़ हर मोर्चे पर बुलंद करने वाले एकमेव संगठन, बामसेफ़ का 38 वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन 26 और 27 दिसम्बर को नागपुर के राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले समजक्रांति संस्थान, डी के खापर्ड़े, मेमोरीयल ट्रस्ट परिसर, रिंगनाबोडी सम्पन्न होने जा रहा है। पूरे भारत वर्ष से इस अधिवेशन में लाखों की तादाद में संघटना के कैडर सहभागी होते है। इस बार भी यह अधिवेशन भव्यता से सम्पन्न होगा। कोरोना की वजह से सोशल मीडिया के हर प्लाट्फ़ोर्म पर भी लाईव टेलिकास्ट किया जाएगा। जिससे देश के कोने कोने में बैठे कार्यकर्ता आसानी से अधिवेशन में शामिल हो पायेंगे।

दो दिवसीय इस अधिवेशन का उद्घाटन बामसेफ़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मूलनिवासी इंजीनियर एन गंगाधर करेंगे। तथा, सिदो कान्हु मुर्म विश्वविद्यालय, दुमका, झारखंड की कुलपति सोना झारिया मिंज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेगी।

इस अधिवेशन में विभिन्न विषयों पर कुल 4 सत्र होगे। जिसमें पहला सत्र 26 दिसम्बर को शाम 6 बजे शुरू होगा। भारत का संविधान- एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन और इसका स्वरूप और दिशा इस विषय इस सत्र में चर्चा की जाएगी।

दूसरा सत्र 27 दिसम्बर सुबह 9 बजे सुरु होगा। मूलनिवासी मीडिया की वर्तमान स्थिति, हमारे आंदोलन के लक्ष प्राप्त करने के लिए इसका उपयोग और विस्तार इस विषय पर चर्चा होगी।

तीसरा सत्र 27 दिसम्बर को 11.30 बजे सुरु होगा। इस सत्र में कोरोना महामारी की आड़ में सरकारी संस्थानों का निजीकरण, कर्मचारियों की छटनी और मज़दूर क़ानूनों का ख़ात्मा संविधान का स्पष्ट उल्लंघन- एक गम्भीर चर्चा इस विषय पर चर्चा होगी।

चौथा सत्र दोपहर 3 बजे सुरु होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020-मूलनिवासी बहुजन समाज को शिक्षा से वंचित करने का ब्रह्मणवादी षड्यंत्र इस विषय पर चर्चा की जाएगी।

तथा शाम 6 बजे चौथे सत्र में 2021 में OBC सहित सभी की जातिगत जनगणना एवं धर्मकोड का प्रावधान की माँग महत्वपूर्ण अजेंडा इस विषय पर चर्चा होगी। तथा समापन रात 8 बजे होगा।

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