मूलनिवासी बहुजन समाज के लिए समर्पित मू० चाबी डूंगा अंबेडकर जी का निधन।

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बीते 26 फरवरी, 2023 को मूलनिवासी बहुजन समाज के लिए समर्पित मूलनिवासी चाबी डूंगा अम्बेडकर जी का निधन हो गया। बताते चले कि फुले-अम्बेडकरी आंदोलन के समर्पित सिपाही के रूप में इन्होंने मूलनिवासी संघ और बामसेफ में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं।

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“पैदा तो हिंदू हुआ पर मरूंगा हिंदू नहीं” यह कहना था बाबा साहेब डॉ० भीमराव अंबेडकर का और आज इसी रास्ते मे बाबा साहेब के वैचारिक अनुयायी चल रहे हैं।

जिनमे से एक नाम था मूलनिवासी चाबी डूंगा अंबेडकर जी का जो अब हमारे बीच नही रहे। अंबेडकर जी ने अपनी इन्तिम सांसे 26 फरवरी को ली ।

बताते चलें कि चाबी डूंगा अंबेडकर ने बाबा साहेब के बताए नक्से कदम पर चलते हुए अपने पूरे जीवन को फुले-अंबेडकर आंदोलन को समर्पित कर दिया। वे जन्मे तो एक हिन्दू के रूप में थे लेकिन उन्होंने अपनी अंतिम सांसे एक बौद्ध के रूप में ली ।

बताते चले कि बाबा साहेब ने महाराष्ट्र के येवला में शोषित वर्ग को धर्म चुनने का अधिकार देने की वकालत करते हुए अपने भाषण में कहा था कि, “पैदा तो हिंदू हुआ पर मरूंगा हिंदू नहीं”

उन्होंने अपने समाज से कहा था कि, आप एक सम्मानजनक जीवन चाहते हैं तो आपको अपनी मदद खुद करनी होगी और यही सबसे सही मदद होगी।
उन्होंने कहा था, अगर आप आत्मसम्मान चाहते हैं, तो धर्म बदलिए। अगर एक सहयोगी समाज चाहते हैं, तो धर्म बदलिए। अगर ताकत और सत्ता चाहते हैं, तो धर्म बदलिए। समानता, स्वराज और एक ऐसी दुनिया बनाना चाहते हैं, जिसमें खुशी खुशी जी सकें तो धर्म बदलिए।

बाबा साहेब के इस भाषण में पूरे समाज की पीड़ा और भावना इस कदर छुपी थी कि एक ऐतिहासिक घटना का जन्म होना ही था। और इसी का परिणाम है कि आज सैकड़ो मूलनिवासी बहुजन समाज के लोग बुद्ध के शरण में घर वापसी कर रहे हैं।

उन्ही में एक थे मूलनिवासी चाबी डूंगा अंबेडकर जिन्होंने बीते 7 फरवरी को नागपुर दीक्षाभूमि में बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी ।

बताते चले की चाबी डूंगा अंबेडकर जी का जन्म 3 जनवरी, 1948 ईसवी में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में हुवा था। इन्होंने फुले-अम्बेडकरी विचारधारा को समाज मे प्रसारित करने की दिशा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं।

चाबी डूंगा अंबेडकर जी साल 2006 से 2016 तक बामसेफ से जुड़े रहे। इसके अलावा वे मूलनिवासी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे । वे मूलनिवासी संघ में अपनी सेवा साल 2016 से दे रहे थे। इसके अलावा वे इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत भी रहे।

खराब स्वास्थ्य के बाद भी वे हमेसा समाजिक कार्यो से जुड़े रहे। बताते चले कि बीते 3 से 4 फरवरी तक सतना में हुए मूलनिवासी संघ के राष्ट्रीय महाधिवेशन में इन्होंने बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया था।

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