मोरबी पुल हादसे में हुवा बड़ा खुलासा। जंग लगे तारो का किया गया था इस्तेमाल ?

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हादसे से पहले ही टूट चुके थे पुल को जोड़ने वाले तार।

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गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी के ऊपर बने केबल ब्रिज का टूटना पिछले साल हुए सबसे बड़े हादसों में से एक था। याद होगा कि पिछले साल 30 अक्टूबर को ब्रिटिश काल का यह ब्रिज ढह जाने से 47 बच्चों सहित 135 लोग मारे गए थे। जांच से पता चला है की, ब्रिज के ढहने के पीछे का कारण आधे तारों में जंग लगना और पुराने सस्पेंडर्स को नए के साथ वेल्डिंग कर देना शामिल है।

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गुजरात के मोरबी का यह हादसा साल 2022 में हुए सबसे बड़े हादसों में एक था। यह पुल 30 अक्टूबर, 2022 को ढह गया था। जबकि इसके ढहने के ठीक चार दिन पहले यानी 26 अक्टूबर, 2022 को एक निजी कंपनी द्वारा मरहम्मत के बाद आम लोगो के लिए फिर से खोला गया था।

इस हादसे में 47 बच्चों सहित 135 लोग मारे गए थे। जबकि 56 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे के बाद विशेष जांच दल एसआईटी का गठन किया था। जिसने अपनी प्रारंभिक जांच की रिपोर्ट सौंप दी हैं।

जांच दल ने प्रारंभिक जांच में कुछ प्रमुख कमियों के बारे में बताया गया है जिनके चलते पुल टूटा था। उन कमियों में ब्रिज पर लगे आधे तारों में जंग लगना और पुराने सस्पेंडर्स को नए के साथ वेल्डिंग कर देना शामिल है।

जांच रिपोर्ट बताती हैं कि, 49 तारों में से 22 में जंग लगी हुई थी, जो इंगित करता है कि वे तार घटना से पहले ही टूट गए होंगे। बाकी बचे 27 तार बाद में टूट गए।’

बताते चलें कि मोरबी में घड़ी और ई-बाइक बनाने वाली कंपनी ‘ओरेवा ग्रुप’ को शहर की नगर पालिका ने पुल की मरम्मत करने तथा संचालित करने के लिए पनद्रह साल तक का ठेका दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ओरेवा समूह ने यह ठेका एक अन्य फार्म को दे दिया था, जिसने रेनोवेशन के लिए आवंटित दो करोड़ रुपये में से मात्र बारह लाख ही खर्च किया था।

इस घटना के बाद ही ओरेवा ग्रुप के प्रबंध निदेशक जयसुख पटेल सहित दस आरोपियों को आईपीसी की धारा 304, 308, 336, 337 और 338 के तहत गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार किए गए नौ लोगों में से चार ओरेवा ग्रुप से संबद्ध हैं।

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