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बाबा साहेब के विचारों पर चलने वाले सच्चे अंबेडकरवादियों का सबसे बड़ा दुश्मन मनुवाद हैं। और यह भी सच है की यह मनुवादी सबसे ज्यादा इन सच्चे अंबेडकरवादियों से ही डरते हैं। यह साबित करता है, महाराष्ट्र की वह घटना जिसमे एक सच्चे अंबेडकरवादी अक्षय भालेराव की द्विजों ने हत्या कर दिया। क्योंकि उसके सहयोग से इस साल इलाके में अंबेडकर जयंती मनाई गई थी।
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मनुवादियों में अंबेडकरवादियों का खौफ कितना है इस बात का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है की अगर मनुवादियों के सामने एक खूंखार शेर और एक फुले – अंबेडकरी विचारधारा के सच्चे अंबेडकरवादी को खड़ा कर दे तो मनुवादी शेर को छोड़कर उस अंबेडकरवादी से पहले भागना चाहेगा।
इस समय देश के सबसे बड़े सामाजिक संगठनों में बामसेफ की गिनती होती हैं। और मूलनिवासी बहुजन समाज की सबसे बड़ी सामाजिक संगठन राष्ट्रस्तर पर कोई है तो वह बामसेफ हैं, जिसका आधार ही फुले – अम्बेडकरी विचारधारा हैं।
बामसेफ अक्सर अपने प्रशिक्षण शिविरों में मूलनिवासियों से कहता रहा है की उन्हें विचार धारा के स्तर पर अपने दोस्त और दुश्मनों की पहचान करना चाहिए। क्योंकि आज हर कोई बाबा साहेब का नाम लेके काम निकाल लेता हैं। नेताओं से लेकर अन्य लोगो के जुबान से भी आज कल जय भीम निकल जाता हैं। क्योंकि इन्हें जय भीम बोलने वालो से नही बल्कि मूलनिवासी महापुरुषों के विचारधारा को आगे बढ़ाने वालों से दिक्कत हैं। और उन्हें मनुवादी अपना सबसे बड़ा दुश्मन भी मानते हैं।
हाल ही में एक मामला सामने निकल कर आया हैं जिसमे द्वीजों के झुंड ने एक सच्चे अम्बेडकरवादी मूलनिवासी अक्षय भालेराव की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसके सहयोग से इस साल चौदह अप्रैल को गांव में बाबा साहेब की जयंती मनाई गई थी। जबकि गांव के द्विज इसके खिलाफ थे।
लेकिन इस मामले पर सब बिलकुल चुप हैं, वे लोग भी जो खुद को अंबेडकरवादी साबित कर राजनीतिक रोटियां सेकते है।
यह गांव महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में उपस्थित हैं जिसका नाम बोंदर हवेली हैं। इस गांव की कुल आबादी लगभग
आठ सौ के आसपास है, जिसमे से तीन सौ मूलनिवासी परिवार रहता हैं।
जानकारी के मुताबिक मूलनिवासी परिवार जमीनहीन है जबकि आपस के जमीनों पर द्वीजो का कब्जा हैं। इसके अलावा गांव के लगभग सारे दुकान द्विजो के ही हैं। मूलनिवासी परिवारों का कहना है की, गांव में दुकान लगाना और गांव का शासन सभी द्विज समुदाय के नियंत्रण में है।
इसके अलावा मृतक मू० अक्षय के परिवार का कहना है कि द्विज समुदाय के कई लोग खुलेआम तलवारें और कटार लेकर घूमते हैं।
गांव वालो का कहना है की अक्सर दोनो समुदायों के बीच हिंसक झड़प होती रहती हैं। यह भी आरोप लगाया की अक्सर पुलिस वाले द्वीजो को ही सही ठहराते हैं यहां तक कि हमारी शिकायतें भी दर्ज नहीं की जाती हैं।
जरा सोचिए यह वह समय है जब हमारे संविधान को लागू हुए इस देश में बहत्तर साल से अधिक हो गए हैं, तो जरा सोचिए इससे पहले यानी छब्बीस जनवरी, उन्नीस सौ पचास के पहले स्थिति क्या होगी?
और यह सिर्फ एक गांव की स्थिति नही हैं। ऐसे कई गांव आज भी इस देश में मौजूद हैं जहा आज भी द्विजों द्वारा देश के मूलनिवासियों को हर तरह से दबा कर रखने की कोशिश की जा रही हैं।








