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खबर बिहार से निकल कर आई हैं, आरोप हैं की हजारों मनरेगा मजदूरों को पिछले पांच महीने से भुगतान नहीं किया गया हैं। जिसके चलते मजदूरों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी हैं। मजदूरों का आरोप है की भुगतान में देरी के कारण हमें अत्यधिक ब्याज पर ऋण लेना पड़ रहा हैं। जिससे हमारी स्थिति और बदतर होती जा रही हैं।
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एक स्थानीय ग़ैर सरकारी संगठन ‘मनरेगा वॉच’ का दावा है की पच्चीस हजार मनरेगा मजदूरों को पांच महीने से भुगतान नहीं किया गया हैं।
मनरेगा वॉच के अनुसार, बिहार के मुज्जफरपुर के गायघाट, बोचहा और कुरहनी समेत ज़िले के कई ब्लॉकों में लगभग पच्चीस हजार श्रमिकों को कई महीनों से उनकी मज़दूरी नहीं मिल रही है।
जिसके कारण मनरेगा मजदूरों को अत्यधिक ब्याज दरों पर निजी ऋणदाताओं से पैसे उधार लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
देरी से भुगतान के कारण, मजदूर अपने परिवारों और बच्चों के लिए कम से कम दो वक्त का भोजन भी उपलब्ध करा पाने में सक्षम नहीं हैं।
इस मामले में बिहार के मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि, भुगतान में देरी केंद्र सरकार द्वारा बिहार के ग्रामीण विकास विभाग को फंड जारी न करने के कारण हुई है।
मोहम्मदपुर सुरा पंचायत के धबौली गांव की विधवा सुदामा देवी भी उन मजदूरों में शामिल में जिन्हे महीनों तक भुगतान नहीं किया गया हैं।
वे बताती है की, उनके पास अपने पांच बच्चों को खाना खिलाने के लिए पैसे नहीं हैं। उनका सबसे बड़ा बेटा तेरह साल का है, जो पानी और नमक के साथ खराब गुणवत्ता का चावल खा रहा है।
ऐसे भी कुछ मजदूर है जो साहूकारों से मजबूरी में उच्च ब्याज दर पर पैसे लेते हैं। लेकिन समय पर भुगतान न मिलने से वे कर्ज की राशि नहीं चुका पाते हैं। जिससे उनके मूलधन से अधिक ब्याज की राशि हो जाती हैं।








