क्या संविधान लागू होने के सात दशक बाद भी मूलनिवासियों को अच्छे कपड़े पहनने का हक नहीं?

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इस देश में संविधान को लागू हुए बहत्तर साल से भी अधिक समय हो रहा हैं, लेकिन आज भी समाज में उन कुरीतियों को समाप्त नहीं किया गया जो असंवैधानिक होने के साथ – साथ समाज के लिए एक बड़ा धब्बा हैं। क्योंकि हाल ही में गुजरात में एक युवक को सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि उसने अच्छे कपड़े और चस्मा लगाया हुआ था।

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इस देश का संविधान सभी को अपने पसंद की जिंदगी जीने का अधिकार देता हैं। इस देश का संविधान अन्य लोगो के साथ साथ उन पचासी फीसदी मूलनिवासी बहुजन समाज के लोगो को भी सारे अधिकार देती है जिन्हे लगभग ढाई हजार साल से मनुस्मृति ने उन्हें नहीं दिया था।

आज भले ही संविधान मनुवादियों के नियंत्रण में रहने के कारण सिर्फ नाम मात्र का इस देश में लागू हैं। लेकिन इस संविधान ने उन बेड़ियों को जरूर तोड़ा है जो इस मूलनिवासी बहुजन समाज के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक विकास में बाधा बनने का काम करती थी।

आज संविधान के कारण देश के मूलनिवासी भी बेहतर जिंदगी जीने लगे हैं। अच्छे कपड़े, अपने मनपसंद का खाना खाने के साथ जैसे चाहे वैसे जिंदगी जी रहे हैं। लेकिन शायद यह बात द्विजो को हजम नही हो रही हैं।

मामला गुजरात के बनासकांठा ज़िले के गढ़ पुलिस थाना क्षेत्र का है। जहा इक्कीस वर्षीय मूलनिवासी युवक पर द्विजों के लगभग दर्जन भर सदस्यों द्वारा हमला किया गया था। यह हमला बस इसलिए किया गया था क्योंकि इक्कीस वर्षीय मूलनिवासी युवक जिगरभाई ने अच्छे कपड़े और धूप से बचने के लिए चश्मा लगाया हुआ था। जो द्विजों को बर्दाश्त नही हुई।

मिली जानकारी के मुताबिक पीड़ित को बचाने आए उनके भाई और मां पर भी आरोपियों ने हमला किया । लेकिन बाद में अन्य लोगो के आने पर द्विज आरोपी वहां से भाग निकले। जिसके बाद घायल पीड़ितो को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

इस घटना में सात आरोपियों के खिलाफ कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है लेकिन अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया हैं।

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