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मूलनिवासी बहुजन समाज में जन्में पेरियार ई० वी० रामास्वामी नायकर ने हमेशा देश के मूलनिवासियों को पाखंडवाद और अंधविश्वास से दूर रखने की कोशिश की। उन्होंने हमेशा भारतीय समाज में सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया । उनकी कही हुई बाते और लेख आज भी मनुवादियों के बौखलाहट का कारण बनती हैं।
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सत्रह सितंबर, अठारह सौ उन्यासी में पश्चिमी तमिलनाडु के इरोड में जन्में पेरियार ई० वी० रामास्वामी नायकर हमेशा जातिवादी व गैर बराबरी वाले हिन्दुत्व का विरोध किया।
पेरियार का मानना था की, हिंदुत्व का विरोध मूलनिवासी बहुजन समाज के उत्थान का एकमात्र विकल्प हैं।
पेरियार अपनी मान्यताओं का पालन करते हुए आजीवन भर जाति और हिंदू-धर्म से उत्पन्न असमानता और अन्याय का विरोध करते रहे।
पेरियार का राजनीतिक इतिहास भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने द्रविड़ कजगम नामक राजनीतिक पार्टी की स्थापना की थी।
उन्होंने भले ही सन उन्नीस नौ उन्नीस में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ मिलकर राजनीति की । लेकिन जब उन्हें पता चला की कांग्रेस सिर्फ ब्राह्मणों की पार्टी है और ब्राह्मणों के हितों की सेवा करती है तो उन्होंने सन उन्नीस सौ पच्चीस में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया।
वे एक महत्वपूर्ण भारतीय समाजसेवी, राजनेता और मूलनिवासी अधिकारों के प्रशंसक थे। उन्होंने अपने जीवन में अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़े वर्ग को समाज में समानता और न्याय दिलाने की ओर महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं।
उन्होंने अपने जीवन में कई सामाजिक आंदोलन चलाए, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के बहुसंख्यक मूलनिवासी समाज के लिए समानता, शिक्षा, और न्याय की स्थापना करना था ।
उन्होंने हमेशा भारतीय समाज में सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष किया और अपने जीवन में लोगों के बीच एक मिलनसर समाज की स्थापना के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
पेरियार कहते हैं की, उन देवताओ को नष्ट कर दो जो तुम्हें शुद्र कहे, उन पुराणों और इतिहास को ध्वस्त कर दो, जो देवता को शक्ति प्रदान करते हैं। उस देवता की पूजा करो जो वास्तव में दयालु भला और बौद्धगम्य है।
द्रविड़ कड़गम आंदोलन का मतलब समझाते हुए पेरियार कहते है की, इसका केवल एक ही निशाना है कि, इस आर्य ब्राह्मणवादी और वर्ण व्यवस्था का अंत कर देना, जिसके कारण समाज ऊंच और नीच जातियों में बांटा गया है।
वे कहते है की, द्रविड़ कड़गम आंदोलन उन सभी शास्त्रों, पुराणों और देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखता, जो वर्ण तथा जाति व्यवस्था को जैसे का तैसा बनाए रखे हैं।







