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सत्ताधारी पार्टियों ने भारतीय कानून व्यवस्था का उपयोग अपने हिसाब से किया। यही कारण है की आज देश का कानून सबसे लिए बराबर नही हैं। हाल ही में बिलकिस बानो मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा की, कुछ दोषी ऐसे हैं जिन्हें ‘दूसरों के मुकाबले ज्यादा विशेषाधिकार प्राप्त’ हैं।
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भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिकों को समान अधिकार दिए हैं। लेकिन संविधान चलाने वालों ने संविधान का उपयोग अपने हिसाब से किया और यही वजह है की समानता के प्रतीक भारतीय संविधान के कानून, देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान नहीं हैं।
हम सब जानते है की कैसे सिस्टम द्वारा सत्ता तक पहुंच रखने वाले लोगो और एक आम जनता के साथ गैर बराबरी का व्यवहार किया जाता हैं।
जहा एक तरफ किसी बड़े जुर्म के लिए सजा काट रहे ताकतवर लोगो को वे सारी सुख सुविधाएं मिलती हैं, तो वही दूसरी ओर छोटे मोटे गुनाहों के लिए सजा काट रहे आम जनता को जेल में कठोर रवैए के साथ रखा जाता हैं।
बताते चले की, बिलक़ीस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले में ग्यारह दोषियों की सज़ा माफ़ी और समयपूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई में एक दोषी के वकील की दलीलें सुनते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि, इस मामले में दोषियों को कई दिनों तक कई बार बाहर आने का मौक़ा मिला।
बीते गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा की, कुछ दोषी ऐसे भी हैं जिन्हें ‘दूसरों के मुकाबले ज्यादा विशेषाधिकार प्राप्त’ हैं।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा की, इस मामले में उन्हें यानी दोषियों को कई दिनों तक बाहर आने का मौका मिला। कई दिनों तक, कई बार मौका मिला।
मालूम हो की बीते पंद्रह अगस्त दो हजार बाईस को अपनी क्षमा नीति के तहत गुजरात की भाजपा सरकार द्वारा माफी दिए जाने के बाद बिलकीस बानो सामूहिक दुष्कर्म और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सभी ग्यारह दोषियों को सौलह अगस्त, दो हजार बाईस को गोधरा के उप-कारागार से रिहा कर दिया गया था।
गुजरात सरकार के इस निर्णय की विश्व स्तर पर आलोचना भी हुई थी । जिसके बाद आरोपियों की समय पूर्व रिहाई के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई थी।








