लखीमपुर खीरी में क्लस्टर अधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न।

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बीते सत्रह सितंबर, दो हजार तेईस दिन रविवार को मूलनिवासी संगठनों द्वारा बिलोबी हाल, लखिमपुर खीरी उत्तर प्रदेश में बीएस फोर के तहत क्लस्टर कन्वेंशन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता बामसेफ के राष्ट्रीय संगठन सचिव सह संविधान प्रबोधक मूलनिवासी सुरेश द्रविड़ ने किया।

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बीएस फोर यानी भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन राष्ट्रव्यापी महा जनजागरण अभियान के तहत
बामसेफ, मूलनिवासी संघ,भीम आर्मी, दलित पैंथर्स व अन्य फुले अम्बेडकरी संगठनों द्वारा बिलोबी हाल लखिमपुर खीरी में क्लस्टर अधिवेशन का आयोजित किया गया ।

यह कलस्टर अधिवेशन बामसेफ के राष्ट्रीय संगठन सचिव सह संविधान प्रबोधक मूलनिवासी सुरेश द्रविड़ की अध्यक्षता में संपन्न की गई।

क्लस्टर कन्वेंशन की अध्यक्षता करते हुए सुरेश द्रविड़ ने कहा कि, आज भारत का लोकतंत्र अत्यंत भयानक संकट की स्थिति से गुजर रहा है, यहां एकाधिकार और वर्चस्ववादी तत्व लोकतंत्र और मानवता को नेस्तनाबूद करना चाहते है। लेकिन हम भारत देश में मानवता और लोकतंत्र का कत्ल नहीं करने देंगे।

उन्होंने कहा की, आज देश में आतंक, दंगा-फसाद और खरीद-फरोख्त की राजनीति इनके हथियार बन गए है, जिसे देखकर सामान्य और आम आदमी बहुत ही हैरान और परेशान हो गया है।

उन्होंने कहा की, सामान्य आदमी के मन में रोष तो बहुत बढ़ रहा है, लेकिन प्रचंड बहुमत के दबाव के षड़यंत्र में वह अपने आप को उपेक्षित और असहाय महसूस कर रहा है। इसलिए हमने यह निर्णय लिया है कि, वर्तमान स्थिति से निपटने के लिए हम व्यापक रूप से जनमानस को जागरूक करेंगे।

क्लस्टर अधिवेशन में उपस्थित मूलनिवासी संघ के राष्ट्रीय कार्यालय सचिव मूलनिवासी डॉ० आनन्द ने कहा कि, हम संवैधानिक भारत के सबसे कठीन दौर से गुजर रहे है, आज देश में कागज पर विधि का शासन है, परन्तु जमीन पर व्यवहारिक तौर पर आर एस एस और एक खास वर्ग की मानसिकता अधिशासन पर हावी है।

उन्होंने कहा की, इनका यह हिम्मत इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि इन लोगों ने चुपके से लोकतांत्रिक व्यवस्था में घुसकर तानाशाही का कानून लागू कर दिया है , यह अत्यंत घातक और विध्वंसक कृत्य है।

लोगो को संबोधित करते हुए कहा की, मानव ने लोकतंत्र इसलिए अपनाया है क्योंकि मानव का सहजीवन शांतिपूर्ण बना रहे, उनके वैचारिक टकराव की स्थिति में हिंसा, रक्तचाप और मानव संहार न हो , मामले आपसी वार्तालाप और वैचारिक बहस से हल हो जाए, जिसके लिए संसदीय प्रणाली का विकास हमारे पुरखों ने किया था। लेकिन आज मौजूदा सरकार में विराजमान लोग हिंसा के सहारे शासन प्रशासन में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है और भारत की जनता को सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक दृष्टि से विभाजित किया जा रहा है, जो अत्यंत दुखद है और ये राष्ट्र की एकता और अखंडता के हित में नहीं है।

अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ नागेंद्र यादव ने कहा कि, वर्तमान समय में संविधान की मूल भावना को तहस नहस किया जा रहा है, जिसका दुष्प्रभाव भारत देश पर हो रहा है। जिससे हम राष्ट्रीय संकट की ओर बढ़ रहे है।

उन्होंने कहा की, ऐसी स्थिति में हम मुकदर्शक बन कर खड़े नहीं रह सकते, केवल टीका टिप्पणी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। आज यह समय की मांग है, हर हाल में तानाशाही के नशे में चूर लोगों का नशा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया से उतारा जाए।

उन्होंने कहा की, संविधान की गरिमा को बरकरार रखते हुए जनहितकारी शासन बुलंद किया जाए। इन सबके लिए जन शिक्षा अधिकार मंच कैथल देशव्यापी संगठनों के साथ मिलकर सांझा मोर्चा बनाएगी।

मूलनिवासी डॉ नागेंद्र यादव ने कहा की, राष्ट्रव्यापी महा जनजागरण और जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस अभियान में लोकतंत्र की व्यवस्था में व्याप्त तानाशाही के सारे सबूत सार्वजनिक किए जाएंगे, और जन मानस के रोष और प्रतिरोध से तानाशाही के गरूर को ध्वस्त किया जाएगा।

कार्यक्रम के संयोजक मूलनिवासी वीरबहादुर और सिद्धार्थ गौतम ने कहा कि, आगमी बाइस अक्टूबर को निजीकरण का विरोध करके और संविधान के पक्ष में नागपुर में राष्ट्रीय पथ संचलन किया जाएगा। जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से दस हजार संविधान प्रबोधक हिस्सा लेंगे। उन्होंने उपस्थित सभी साथियों को बाइस अक्टूबर को नागपुर में होने जा रही राष्ट्रीय पंथ संचलन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।

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