=============
भारत के संविधान को लागू हुए सात दशक से अधिक का समय हो चुका हैं। लेकिन आश्चर्य की बात है की आज भी मूलनिवासी बहुजन समाज के सैकड़ो लोग अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित हैं या यूं कह लीजिए की इन अधिकारों से वंचित रखा गया हैं।
==============
इसमें कोई शक नहीं की भारत का संविधान विश्व का सबसे बेहतरीन संविधान हैं। संविधान निर्माताओं ने इस देश को और इस देश के नागरिकों को एक बेहतरीन संविधान बना कर दिया। लेकिन ब्राह्मणवादी विचारधारा के राजनीतिक पार्टियों ने कभी भी देश के संविधान को पूर्ण रूप से लागू नहीं किया।
छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास (26 जनवरी, 1950), यह वह तारीख है जब देश का संविधान लागू हुआ और आज तिहत्तर साल (73 साल) बाद भी संविधान को पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया हैं ।
भारत विभिन्नताओं से भरा हुआ देश हैं। इस देश में विभिन्न जाति, धर्म, भाषा और विभिन्न संस्कृति को मानने वाले लोग रहते हैं लेकिन संविधान निर्माताओं ने बिना किसी भेदभाव के सभी को समान अधिकार दिए जो विभिन्नताओं से भरे इस देश को एक सूत्र में बांधे रखता हैं।
संविधान में दिए मौलिक अधिकारों से देश के सभी नागरिक परिचित हो यह जिम्मेदारी संविधान ने सरकार को सौंपी थी। लेकिन आश्चर्य की बात है की संविधान लागू होने के सात दशक बाद भी मूलनिवासी बहुजन समाज के कई लोग अपने मौलिक अधिकारों से परिचित नहीं हैं।
संविधान लागू होने के तिहत्तर साल बाद भी देश के कई लोग संविधान के महत्व, उसमे दिए मौलिक अधिकारों और संविधान के प्रावधानों से अंजान हैं। लेकिन तारीफ करनी होगी उन संगठनों की जिन्होंने घर – घर जाकर लोगो को संविधान से परिचित कराया हैं।
आज बामसेफ द्वारा चलाए जा रहे बीएस फॉर (भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन) अभियान के तहत हजारों संविधान प्रबोधक लोगो को संविधान से परिचित कराया हैं।
बामसेफ और इसके ऑफ शूट विंग्स जैसे मूलनिवासी संघ, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ, मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ और मूलनिवासी सभ्यता संघ जैसे संगठनों द्वारा जागृति शिविरो के माध्यम से लगातार भारतीय संविधान का प्रचार प्रसार किया हैं।
बामसेफ द्वारा चलाए जा रहे है बीएस फॉर यानी भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन राष्ट्रव्यापी महा जनजागरण अभियान के तहत सैकड़ो मूलनिवासी अपने संवैधानिक अधिकारों से परिचित हुए और लगातार हो रहे हैं।







