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बीते अठाईस फरवरी, दो हजार चौबीस को ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क के बैनर तले कलकत्ता में सौ से अधिक वैज्ञानिकों ने केंद्र सरकार पर वैज्ञानिक सोच घटाने और झूठे नैरेटिव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया हैं। जिसमे कोविड – नाइनटीन महामारी के दौरान सरकार द्वारा फैलाए गए विभिन्न प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।
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ब्राह्मणवादी राजनीतिक पार्टियों ने इस देश की जनता को जैसे चाहा वैसे लूटा हैं। इस देश के लोगो को बेवकूफ बनाने में राजनीतिक पार्टियों ने महारथ हासिल किया हुआ हैं।
विभिन्न सरकारों ने धर्म के नाम पर, नौकरी के नाम पर, पांच किलो चावल के नाम पर और साल भर भी न चलने वाले शौचालय के नाम पर बेवकूफ बनाया हैं।
इस देश के लोग इतने भोले और निठल्ले बैठे है की देश की सरकार जब चाहे, जैसे चाहे इनका इस्तेमाल करती हैं। कभी ताली और थाली बजाने में, कभी दिया जलाने में, तो कभी मिट्टी के साथ फोटो खिंचवाने में।
आपको मालूम होगा कोविड – नाइनटीन महामारी में जहा दुनियां इस महामारी से लड़ रही थी वहां भारत में सरकार लोगो को बेवकूफ बना रही थीं।
इस बात का विरोध सिर्फ हम नहीं बल्कि इस देश के सौ से अधिक वैज्ञानिकों ने की हैं।
बीते पच्चीस फरवरी, दो हजार चौबीस को कलकत्ता में ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क के बैनर तले सौ से अधिक वैज्ञानिकों ने एक बयान जारी कर कहा है कि सरकार और उसके विभिन्न अंग वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्वतंत्र या आलोचनात्मक सोच और साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण का विरोध करते हैं।
यही नहीं वैज्ञानिकों ने मोदी सरकार पर वैज्ञानिक सोच घटाने और झूठे नैरेटिव को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया हैं।
बताते चले की ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क चालीस संगठनों का एक संघ हैं। यह नेटवर्क जनता के बीच वैज्ञानिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का काम करती हैं।
वैज्ञानिकों ने आरोप लगाया कि, सरकार पौराणिक कथाओं को इतिहास मानने के विश्वास को बढ़ावा दिया है साथ ही बहुसंख्यक समुदाय के बीच भी विविध धार्मिक मान्यताओं के विपरीत एकात्मक बहुसंख्यक धर्म और संस्कृति का निर्माण करने के लिए झूठे नैरेटिव का इस्तेमाल किया हैं।








