प्रधानमंत्री द्वारा संसद में दिए गए एक वक्तव्य पर किसान संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री के राज्यसभा में दिए गए भाषण को “किसानों का अपमान” बताते हुए ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ (SKM) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निंदा की है।
आपको बता दें की किसान संगठनों द्वारा लाखों किसान परिवार पिछले 75 ज्यादा दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर एमएसपी का कानून बनाने और तीन फार्म एक्ट की वापसी के लिए धरना देकर बैठे है। संयुक्त किसान मोर्चा इसका नेतृत्व कर रहा है।
आपको बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा देश भर के करीब 500 किसान संगठनों का संयुक्त मोर्चा है। इसमें पंजाब और हरियाणा के करीब 40 संगठन हैं।
लगभग पिछले कई महीनों से पंजाब, हरियाणा के साथ साथ कई राज्यों के किसानों ने सरकार को आवेदन दिया है की सरकार तीन कृषि संबंधित कानून वापस लें। केवल संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा ही नहीं बल्कि अन्य कई हजारों संगठनों ने भी केंद्र सरकार को अपने स्वतंत्र आवेदन भेजे हैं। वे संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े नहीं है। लेकिन फिर भी उनकी भी वही मांग है जो संयुक्त किसान मोर्चा की है।
अब संसद के बजट सत्र में इसको लेकर बड़ी गहमागहमी में आरोप प्रत्यापारोप हो रहे हैं। बीजेपी का कहना है कि उसकी वही नीति है जो कांग्रेस की थी। कांग्रेस यह करना चाहती थी लेकिन अब यू टर्न लिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आंदोलन की चर्चा की पृष्ठभूमि पर संसद में एक भाषण में कहा कि “श्रमजीवी, बुद्धिजीवी, ये सारे शब्दों से परिचित हैं, लेकिन मैं देख रहा हूं कि पिछले कुछ समय से इस देश में एक नई जमात पैदा हो गई है और वो है आंदोलनजीवी।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान का किसान संगठनों ने कड़ी निंदा करते हुए कहा है “यह किसानों का अपमान है”।
उधर स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने अस्पताल से एक वीडियो लाइव करते हुए कहा की प्रधानमंत्री को यह बयान शोभा नहीं देता। यह देश आंदोलन पर खड़ा देश है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में प्रधानमंत्री जिस विचारधारा से आते हैं उनके लोग उस में नहीं थे। योगेंद्रयादव ने कहां कि हां मैं आंदोलन जीवी हूं।
किसान संगठनों से ही नहीं बल्कि विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं की भी प्रतिक्रियाएं आयी।
शिवसेना नेता और सामना वृत्तपत्र के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने एनडीटीवी को एक इंटरव्यू में कहा कि हम हम बुद्धिजीवी, कलमजीवी आन्दोलनजीवी है। महाराष्ट्र में बीजेपी के लोग विपक्ष में है, बीजेपी का आज वहां हर दिन आंदोलन चल रहा है। जहां जहां बीजेपी की सरकार नहीं है वहां बीजेपी के लोग आंदोलन कर रहे हैं क्या वे प्रधानमंत्री के इच्छा के विरुद्ध आंदोलन कर रहे हैं? संजय राउत ने कहा की किसान आंदोलन का प्रधानमंत्री ने मजाक उड़ाया है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश ने कहा की “मुझे उन लोगों को क्या कहना चाहिए जो दान लेने के लिए बाहर जाते हैं? क्या वे चंदाजीवी संगठन के सदस्य नहीं है?”
महाराष्ट्र की जानीमानी पत्रकार राही भिड़े ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसानों का आंदोलन नेशनल ही नहीं इंटरनेशनल मुद्दा हो गया. पीएम उनसे बातें नहीं करते, बस इधर-उधर की बातें करते हैं. आगे रही भिड़े ने कहा कि ये आंदोलनजीवी लोग चाहे जो भी हों, किसानों का साथ दे रहे हैं तो हर्ज ही क्या है? अगर अलग-अलग बिरादरी के लोग इकट्ठा हुए हैं तो एक मकसद से इकट्ठा हुए हैं। पीएम को आपत्ति क्यों है?
आपको बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा’ किसानों की मांगों को गंभीरता से और ईमानदारी से हल करने में सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया है। किसान संगठनों का कहना है की सरकार विद्युत संशोधन विधेयक को संसद में पेश कर रही जबकि ड्राफ्ट बिल को वापस लेने का आश्वासन सरकार ने दिया था दिया था।
‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने यह चेताया कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश में किसान महापंचायतों से दिल्ली के धरनों पर बैठे किसानों में काफी उत्साह बढ़ा है। इन महापंचायतो से किसान दिल्ली धरनों में शामिल होंगे।
आपको बता दें किसानों को समर्थन देने के लिए अब विभिन्न सगठनों के लोग भी अपने अपने जिलों से समर्थन दे रहें हैं। सरकार को और संयुक्त किसान मोर्चा को लिखित में चिट्ठी लिख रहे हैं।







