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वर्तमान समय में महाराष्ट्र के किसान काफी बुरे दौर से गुजर रहे हैं। जिसका कारण प्याज के दामों में आई भारी गिरावट से हुवा नुकसान हैं। अब किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 170 किलोमीटर की पदयात्रा पर निकल गए हैं। उम्मीद है कि 20 मार्च, 2023 तक सैकड़ो किसान नासिक से मुम्बई पहुंच जाएंगे।
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बताते चलें कि पूरे भारत में प्याज का उत्पादन सबसे अधिक महाराष्ट्र में होता हैं। लेकिन प्याज की अधिकता के कारण इसके दाम इस बार इतने कम हो गए कि किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का दावा है कि जहा पहले प्याज साढ़े ग्यारह सौ रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था । वही अब इसके दाम गिरकर 550 रुपये हो गए है। कही-कही तो प्याज 200 से 400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा हैं।
किसानों का कहना है कि बीते कुछ हफ़्तों से मंडियों में प्याज के दाम इतने गिर गए हैं कि उनके लागत के बराबर भी आमदनी नही हो पा रही हैं। ऊपर से फसल को मंडियों तक लाने में यातायात शुल्क अलग से किसानों को ही उठानी पड़ती हैं।
प्याज के दामो में आई गिरावट से हुए नुकसान के बाद किसानों ने विभिन्न तरीकों से अपनी इस संकट से सरकार को अवगत कराने की कोशिश की हैं। किसी ने प्याज की ढेर लगाकर उसे जलाया तो किसी ने युही सड़को पर प्याज फेक दिए।
अब महाराष्ट्र के कई जिलों से सैकड़ो किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नासिक से मुम्बई के लिए पदयात्रा पर चल पड़े हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस पद यात्रा में करीब 10 हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया हैं। जो एक सौ सत्तर किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बीस मार्च तक मुम्बई पहुंचेंगे।
किसानो ने इस पदयात्रा के दौरान अपनी विभिन्न मांगों को सामने रखा हैं। जिनमें से प्याज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था के अलावा कर्ज माफी, बिजली बिल माफी, कम से कम बारह घंटो की लगातार बिजली सफ्लाई औऱ वन अधिकार कानून पालन समेत आदि मांगे शामिल हैं।
रिपोर्ट की माने तो प्याज के दाम गिरने से किसानों को हुए नुकसान को कम करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 300 रुपये प्रति क्विंटल हर्जाना की घोषण की हैं। लेकिन किसानों की मांग है की सरकार कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल की हर्जाने की सहायता करें।







