बामसेफ के समर्पित एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता भीमराव पगारे जी का रविवार दिनांक 7 अगस्त 2022 को सुबह दिल का दौरा पड़ने से दुखद निधन हुआ। वह 58 वर्ष के थे। उनके पश्चात उनको एक बेटा और बेटी है।
9 जुलाई 1964 को जन्में भीमराव पगारे जी की आंख की रौशनी जन्म से नहीं थे लेकिन विचार की रौशनी तेज थी। बामसेफ के वह मिशनरी कार्यकर्ता थे। विचार, आचरण से नैतिक व्यक्ति के रूप में परिचित भीमराव पगारे जी की जीवन सहचारिणी भी दृष्टिहीन आंख से थी। भीमराव पगारे जी का पूरा परिवार फूले-अम्बेडकरी आंदोलन के लिए समर्पित होकर बामसेफ संगठन से जुड़ा हुआ है।
कर्मठ एवं समर्पित कार्यकर्ता के रूप में वह अपने क्षेत्र (नाशिक महाराष्ट्र) में सभी को परिचित थे। बामसेफ अधिवेशन में आने के बाद केवल आवाज से ही वह कई कार्यकर्ताओं को ध्यान में रखते थे।
हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स में सरकारी नौकरी पर कार्यरत भीमराव पगारे जी बामसेफ के साथ पूरी तरह से समर्पित होकर कर्मचारियों को जोड़ने के लिए कार्य करते थे। अपने परिवार के किसी सदस्य की सहायता से वह साहित्य का पठन करते थे। तथा किसी को साथ लेकर फील्डवर्क करते थे। उनका मानना था कि कर्मचारी वर्ग जैसे अपने नौकरी की सुरक्षा के लिए अपने कर्मचारी संगठन के साथ जुड़े होते है, वैसे ही निस्वार्थ होकर सामाजिक आंदोलन के लिए बामसेफ के साथ जुड़ना चाहिए।
आंदोलन के प्रति समर्पित भीमराव पगारे जी को कला संगीत में भी रूचि थी। वह अपने आप को तरो-ताजा व प्रेरित रखने हेतु हमेशा फूले-आम्बेडकरी गीतों को गाया करते थे। बीएस4 राष्ट्रव्यापी अभियान के लिए भी उन्होंने गीत गाये और सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर के कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित किया।
ऐसे त्यागी, समर्पित व मिशनरी कार्यकर्ता को एमएनटी न्यूज नेटवर्क की ओर से विनम्र अभिवादन।








