समुद्र मंथन और अमृत
पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन की कपोल कल्पित कथा की चर्चा है। समुद्र मंथन में सुर और असुर दोनों की बराबर की भूमिका रही। उस समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले। जिसमें 13 रत्नों के बंटवारे में कोई विवाद नहीं हुआ किंतु जो समुद्र मंथन से अमृत निकला उस पर सुर असुरों में विवाद छिड़ गया। छलिया विष्णु मोहिनी का रूप धारण कर अदाएं बिखेरते हुए उनके बीच आए जहां सुर-असुर आपस में झगड़ रहे थे। मोहिनी को देख असुर मोहित हो गए। असुरों की मन स्थिति को भांपते हुए छलिया विष्णु ने कहा कि यदि आप लोगों को ऐतराज न हो तो मैं अमृत बांट दूं। इस अमृत महोत्सव में छलिया विष्णु ने असुरों के साथ विश्वासघात किया और अमृत का उचित बंटवारा न कर उसे देवताओं को पिला दिया।
आजादी के अमृत का घड़ा
अंग्रेजों ने जब भारत छोड़ने की घोषणा कर दी तो चौधरी सर छोटूराम ने कहा हमें गोरे बनियों की जगह काले बनियों की सरकार नहीं चाहिए हमें देश में किसान और मजदूरों की सरकार चाहिए। बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने कहा कि यदि सत्ता सवर्णों के हाथ में गयी तो इस देश के मूलनिवासियों की स्थिति बहुत बदतर होगी। भारत के आजादी के महोत्सव में छलिया विष्णु के रूप में मोहनदास करमचंद गांधी आए और सबसे पहले उन्होंने लोकतंत्र का गला घोट कर और देश का प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को न बनने देकर इस घोषणा के साथ कि मनुष्यता का सबसे सुंदर फूल ब्राह्मण है इसलिए मैं उसे मुरझाया हुआ नहीं देख सकता। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के हाथ में अमृत का घड़ा सौंप दिया।
शोषक शोषितों का भला नहीं कर सकते
बिहार लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद ने कहा धन धरती और राजपाट में नब्बे भाग हमारा है। इसलिए राजनैतिक सत्ता 90% शोषितों के हाथ में स्थानांतरित करना चाहिए। उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि जिस प्रकार मांस की रखवाली कोई कुत्ता नहीं कर सकता उसी प्रकार शोषकों के हाथ में सत्ता स्थापित करने से वह शोषितों का भला नहीं कर सकते। आजादी के उस महोत्सव में आर्य ब्राह्मणों ने भारत के मूलनिवासियों के साथ विश्वासघात किया और सारा संवैधानिक संस्थाओं पर अपना आधिपत्य जमा लिया।
तिरंगा हाथ में देकर भ्रमित करने का षड्यंत्र
आज भाजपा जो आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है उसने मूलनिवासी समाज से राष्ट्रपति चुन कर उन्हीं की कलम से मूलनिवासी बहुजनों के हक और अधिकारों का खून किया है। इस पर दिमाग लगाने की जरूरत है कि जिस तरीके से उनके आर्य पुरखों ने असुरों के साथ विश्वासघात किया ठीक उसी प्रकार भाजपा भारत के मूलनिवासी एससी एसटी ओबीसी और माइनारटीज के साथ विश्वासघात किया। उनके हक अधिकारों को छीना और इसके बाद उनके हाथ में तिरंगा देकर उनको भ्रमित करने का षड्यंत्र कर रही हैं कि वे लोग लोग इस बात का प्रचार करें कि वर्तमान सत्ता से हम खुश हैं और हम राष्ट्र के प्रति वफादार हैं।
जिस देश का किसान और मजदूर अन्न का उत्पादन करता है जो देश विदेश का भरण पोषण करता है ऐसे देश भक्तों के हाथ में तिरंगा देना यह केवल सत्ता में बैठे हुए लोगों का बौद्धिक षड्यंत्र है। भाजपा ने जिन किसानों के ऊपर बुलडोजर चलाकर उनकी जीवन लीला समाप्त कर दी। भारत के हजारों किसान आंदोलन के दौरान शहीद हो गए। जिस भाजपा के शासन में तथाकथित ऊंची जातियों ने भारत की तमाम मूलनिवासी महिलाओं के साथ अनाचार दुराचार किया। देश के अल्पसंख्यक समुदाय के साथ लगातार मोबलिंचिंग जारी है उनकी हत्याएं की जा रही हैं। फिर भी उनके हाथ में तिरंगा देकर कि यह कहने के लिए कहना कि हम खुशहाल हैं यह मात्र आर्य ब्राह्मणों की धोखाधड़ी है। भाजपा का यह संदेश कि – हर घर तिरंगा घर-घर तिरंगा मतलब भारत का हर घर खुशहाल है – सरासर झूठा है।
संवैधानिक अधिकारों से वंचित करना
ड्यूक ऑफ कनाट की स्वागत समारोह में शासक जातियों ने उनके तथा उनके शासन प्रबंध की भूरि भूरि प्रशंसा किया था। किंतु राष्ट्रपिता फूले ने कहा था, “Tell the grandma we are a happy nation, but 19 crores are without education.” माननीय ड्यूक ऑफ कनाट, आप दादी मां महारानी विक्टोरिया से कहना हम आनंदित देश हैं लेकिन,19 करोड़ लोग शिक्षा विहीन हैं।” राष्ट्रपिता फुले के प्रयास से ही भारत में इस देश के 90% भारत के मूलनिवासियों के लिए शिक्षा का दरवाजा खुला और प्रतिनिधित्व रास्ता दिखाई दिया।
आर्य ब्राह्मणों के बौद्धिक षड्यंत्र को समझने की जरूरत है यदि भारत का मूलनिवासी उनके षड्यंत्र को समझ जाएगा तो “हर-घर तिरंगा घर-घर तिरंगा” के पीछे के उनके मंसूबे को भी आसानी से समझ सकता है। भारत के मूलनिवासियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर देना ही आर्य ब्राह्मणों की आजादी का अमृत महोत्सव है और कुछ नहीं।
– दयाराम
(प्रस्तुत लेख के लेखक प्रख्यात प्रबोधक वक्ता हैं, आपने कई विषयों पर समाज प्रबोधन के लिए पुस्तिकाएं लिखी हैं। आप बामसेफ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा वर्तमान में पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।)






